शनिवार, 26 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो चुके हैं जो 10 अक्तूबर को खत्म होंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार, पितृपक्ष हर वर्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर आश्विन माह की अमावस्या पर खत्म हो रहा है। पितृपक्ष के 15 दिन पितरों को समर्पित होते हैं, जिसमें श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हुए पितरों को प्रसन्न किया जाता है। श्राद्ध पक्ष में पितरगण पितृलोक से अपने परिजनों से मिलने आते हैं और उनको आर्शीवाद देते हैं। वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान कुछ ऐसे संकेत भी मिलते हैं जिसे पितरों का आशीर्वाद माना जाता है। अगर पितृपक्ष के दौरान ऐसे कुछ संकेत मिले तो समझाना चाहिए कि जीवन में सकारात्मक बदलाव आने वाले हैं। आइे जानते हैं इन संकतों के बारे में।
सपने में पितरों को खुश देखना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान अगर सपने में पितृ देव दिखे और वह प्रसन्न मुद्रा में हो तो इससे बहुत ही अच्छा संकेत माना जाता है। इससे इस बात का संकेत मिलता है कि पितृदेव आपसे प्रसन्न हैं और जीवन में आने वाले हर एक बाधा को दूर होती है।
घर में काली चींटियों का आना
पितृपक्ष के दौरान अगर घर में अचानक काली चींटियां दिखाई देने लगें तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काली चींटियों का घर में आना पितरों की कृपा का प्रतीक हो सकता है। ऐसी स्थिति में उन्हें भगाने के बजाय आटा और शक्कर खिलाने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
मुरझाए पौधे का फिर से हरा होना
अगर घर का कोई पौधा काफी समय से मुरझाया हुआ है और पितृपक्ष के दौरान उसमें अचानक हरियाली लौट आती है, तो इसे भी शुभ संकेत माना जाता है। ऐसे में पौधे का फिर से हरा-भरा होना पितरों की प्रसन्नता और उनकी कृपा से जोड़कर देखा जाता है।
किसी जरूरतमंद का अन्न मांगना
पितृपक्ष में दान और भोजन कराने का विशेष महत्व माना गया है। अगर इन दिनों कोई जरूरतमंद व्यक्ति आपके घर आकर अन्न या भोजन मांगता है, तो उसे खाली हाथ लौटाना उचित नहीं माना जाता। सामर्थ्य के अनुसार उसे भोजन कराना या अन्न का दान करना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष में जरूरतमंद को भोजन कराने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
दरवाजे पर गाय का आना
पितृपक्ष के दौरान अगर गाय आपके घर की चौखट पर आ जाए तो इसे धार्मिक मान्यताओं में शुभ संकेत माना जाता है। मान्यता है कि गाय का घर के द्वार पर आना पितरों की प्रसन्नता और उनके आशीर्वाद का प्रतीक हो सकता है।
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