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पौष पुत्रदा एकादशी व्रत को करने से होती है संतान प्राप्ति, यहां जानिए कथा

Fri, 19 Jan 2024 04:48 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

 Pausha Putrada EKadashi 2024: इस बार पौष पुत्रदा एकादशी व्रत 21 जनवरी 2024 को रखा जा रहा है। इस दिन जगत के पालनकर्ता भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन पूरे विधि विधान और सच्चे हृदय से भगवान विष्णु का पूजन करने से सभी सुखों की प्राप्ति होती है।
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पुत्रदा एकादशी व्रत कथा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पौष माह में शुक्ल पक्ष की ग्याहरवीं तिथि को पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस बार पौष पुत्रदा एकादशी व्रत 21 जनवरी 2024 को रखा जा रहा है। इस दिन जगत के पालनकर्ता भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन पूरे विधि विधान और सच्चे हृदय से भगवान विष्णु का पूजन करने से सभी सुखों की प्राप्ति होती है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इस दिन व्रत और पूजा के साथ ही पौष पुत्रदा एकादशी की कथा जरूर सुननी चाहिए। पौष पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा पढ़ने या श्रवण करने से व्यक्ति को संतान प्राप्ति के साथ सभी सुखों की प्राप्ति होती है। चलिए जानते हैं पुत्रदा एकादशी व्रत की कथा...

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इस दिन है पौष पुत्रदा एकादशी, जानें पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा
बहुत समय पहले भद्रावती नगर में सुकेतु नामक राजा राज्य किया करते थे। उनकी पत्नी का नाम शैव्या था। शादी के कई वर्ष हो जाने के पश्चात भी उनकी कोई संतान नहीं थी, जिसके कारण वे दोनों पति-पत्नी बहुत दुःखी रहते थे। इसी व्यथा के कारण एक दिन राजा और रानी मंत्री को राजपाठ सौंपकर वन को चले गये। इस दौरान संतान दुख के कारण उनके मन में आत्महत्या करने का विचार आया, लेकिन उसी समय राजा को यह बोध हुआ कि आत्महत्या से बढ़कर कोई पाप नहीं है।
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पौष पुत्रदा एकादशी पर करें ये उपाय, मिलेगा लाभ

वहीं पर अचानक उन्हें वेद पाठ के स्वर सुनाई दिये, जिस दिशा से वेद पाठ की ध्वनि आ रही थी, वे उसी दिशा में बढ़ते चले गए। जब वे साधुओं के पास पहुंचे तो उन्होंने अपनी सारी व्यथा उन्हें सुनाई। जिसके बाद साधुओं ने उन्हें पौष पुत्रदा एकादशी व्रत के महत्व को समझाया। इसके बाद दोनों पति-पत्नी ने पूरी निष्ठा और नियम के साथ पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें संतान की प्राप्ति हुई, इसलिए निःसंतान दंपतियों के लिए यह व्रत बहुत ही शुभ माना जाता है।

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