फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Paush Amavasya 2022 : नए साल की पहली अमावस्या आज, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Sun, 02 Jan 2022 08:33 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला

सार

New Year 2022: नववर्ष का आगमन हो चुका है। इस बार साल की पहली अमावस्या आज यानी 2 जनवरी को पड़ रही है। धार्मिक रूप से इस अमावस्या के दिन स्नान-दान का बड़ा ही महत्व है। मान्यता है कि इस दिन किसी तीर्थ स्थान पर जाकर स्नान-दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। 
विज्ञापन
पौष अमावस्या - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Paush Amavasya 2022 : आज साल 2022 की पहली अमावस्या तिथि है। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है।  2 जनवरी रविवार को पड़ने वाली अमावस्या को पौष अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस अमावस्या को दर्श अमावस्या भी कहते हैं। धार्मिक रूप से इस अमावस्या के दिन स्नान-दान का बड़ा ही महत्व है। मान्यता है कि इस दिन किसी तीर्थ स्थान पर जाकर स्नान-दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिये अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण भी किया जाता है।  आइए जानते हैं पौष अमावस्या का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि 

विज्ञापन


पौष अमावस्या का शुभ मुहूर्त
अमावस्या तिथि आरंभ: 2 जनवरी, रविववर  प्रातः 3: 41 मिनट से 
अमावस्या  तिथि समाप्त: 2 जनवरी, रविवार रात्रि 12:  4 मिनट पर 

पौष अमावस्या पर बन रहे हैं खास योग
पौष अमावस्या के दिन सर्वार्थसिद्धि योग प्रातः 6:  47 मिनट से शुरू होकर सायं 4:  24 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही प्रातः 9: 42 मिनट तक वृद्धि योग रहेगा। 

पौष अमावस्या पूजा विधि

  • ब्रह्ममुहूर्त में स्नान के पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर स्नान कर लें। 
  • स्नान के बाद तांबे लोटे में जल भरें और उसमें लाल फूल, चावल डाल लें। इसके बाद सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें। ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें।
  • सूर्य पूजा के बाद घर के मंदिर में पूजा करें। देवी-देवताओं को स्नान कराएं। 
  • वस्त्र और पुष्प अर्पित करें। भोग स्वरूप खीर चढ़ाएं। 
  • पितृ दोष से मुक्ति के लिए और अपने पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए इस दिन दूध, चावल की खीर बनाकर, गोबर के उपले या कंडे की कोर जलाकर, उस पर पितरों के निमित्त खीर का भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद थोड़ा-सा पानी लेकर अपने दायें हाथ की तरफ, यानी भोग की बाईं साइड में छोड़ दें। 
  •  एक लोटे में जल भरकर, उसमें गंगाजल, थोड़ा-सा दूध, चावल के दाने और तिल डालकर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके पितरों का तर्पण करना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें