मंगल ग्रह को ज्योतिषशास्त्र में क्रूर ग्रह कहा गया है। कुण्डली में इसकी विशेष स्थिति दुर्घटना और परिवार में मतभेद पैदा कर देती है। मंगल आखिर ऐसा क्यों करता है इसका भेद मंगल के जन्म की कथा में छुपा है।
देवी भागवत् पुराण के अनुसार भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष नामक राक्षस का वध करने के लिए वराह अवतार लिया। इस राक्षस का वध करने के बाद जब वराह भगवान अपने लोक लौटने लगे तब धरती माता ने उनसे पुत्र प्राप्ति की इच्छा प्रकट की।
धरती की मनोकामना पूरी करने के लिए वराह कुछ समय तक धरती के साथ रहे। धरती ने जब पुत्र को जन्म दिया, इसके बाद वराह भगवान लौटकर बैकुण्ठ चले आए।
लेकिन जब धरती के पुत्र मंगल बड़े हुए तो वह इस बात से नाराज हुए कि वराह भगवान ने उनकी माता का त्याग कर दिया। इसलिए मंगल वैवाहिक जीवन में दूरियां पैदा करते हैं। दुर्घटना और रक्तपात की घटनाएं करवाते हैं।