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मार्गशीर्ष माह में अलग-अलग चीजों से श्रीकृष्ण को अभिषेक कराने से मिलता है पुण्य फल

Mon, 18 Nov 2024 11:14 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Margashirsha Month Significance: अगहन के महीने में श्रीकृष्ण का ध्यान और उपासना सच्चे मन से करने पर सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही अमोघ फल की प्राप्ति होती है।
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मार्गशीर्ष माह 16 नवंबर 2024 से शुरू होकर 15 दिसंबर 2024 तक रहेगा। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Margashirsha Month Significance: 16 नवंबर से मार्गशीर्ष माह की शुरुआत हो चुकी है। शास्त्रों में भगवान श्रीकृष्ण ने  मार्गशीर्ष माह को अपना ही स्वरूप बताया है। मार्गशीर्ष भी श्रीकृष्ण का ही नाम है। इस महीने को मगसर, अगहन या अग्रहायण भी कहा जाता है। अगहन के महीने में श्रीकृष्ण का ध्यान और उपासना सच्चे मन से करने पर सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही अमोघ फल की प्राप्ति होती है। स्कंदपुराण के अनुसार, भगवान की कृपा प्राप्त करने की कामना रखने वाले श्रद्धालुओं को अगहन मास में धार्मिक नियमों का पालन करना चाहिए। इस माह में किए गए व्रत-उपवास से भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 

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पुराणों के अनुसार इस महीने में कम से कम तीन दिन तक ब्रह्म मुहूर्त में किसी पवित्र नदी में स्नान करने से प्राणी की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। स्त्रियों के लिए यह स्नान उनके पति की लंबी उम्र और अच्छा स्वास्थ्य देने वाला माना गया है। इस महीने में शंख पूजन का विशेष महत्व है। साधारण शंख को श्रीकृष्ण का पाञ्चजन्य शंख के समान समझकर उसकी पूजा करने से सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है।अगहन मास में जप,तप,ध्यान एवं दान करना शीघ्र फलदाई माना गया है। भगवान श्री कृष्ण की भक्ति और उनके मंत्रों का जाप करना इस माह में बहुत पुण्यदायी है। मार्गशीर्ष मास में श्रद्धा और भक्ति से प्राप्त पुण्य के बल पर हमें सभी सुखों की प्राप्ति होती है।

अगहन माह में अलग-अलग द्रव्यों से स्न्नान का फल
शहद

जो मनुष्य मार्गशीर्ष माह में भगवान श्री कृष्ण को मधु और शक़्कर से स्नान करवाता है,वह स्वर्ग से इस लोक में लौटने पर राजा होता है,ऐसा स्कंदपुराण में कहा गया है।
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दूध
जो मनुष्य अगहन मास में श्री कृष्ण को दूध से नहलाता है,वह स्वर्गलोक में चन्द्रमा, इंद्र,रूद्र और मरुदगणों पर विजय पाता है।

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शंखजल
जो उपासक मार्गशीर्ष के महीने में शंख में तीर्थ का जल लेकर उसकी एक बूंद से भी भगवान का अभिषेक करता है, वह अपने समूचे कुल को तार देता है। जो इस मास में भक्तिपूर्वक शंख ध्वनि करके श्रीकृष्ण को स्नान कराता है,उसके पितर स्वर्गलोक में प्रतिष्ठित होते हैं। मान्यता है कि भजन-कीर्तन आदि के मंगलमय शब्दों के साथ जो भक्ति पूर्वक श्रीहरि को स्नान कराता है उसके जीवन में आनंद होता है।  
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ॐ नमो नारायणाय का उच्चारण करते हुए जल से
जो शंख में जल लेकर 'ॐ नमो नारायणाय' का उच्चारण करते हुए श्रीकृष्ण का अभिषेक करता है, वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है। मान्यता है कि चरणोदक को शंख में रखकर जो अपने मस्तक पर धारण करता है वह सभी कष्टों से मुक्त हो जाता है और जो भक्त भगवान के मस्तक के ऊपर से शंख को घुमाकर उससे अपने घर को सींचता है, उसके घर में कभी अशुभ नहीं होता है।  

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