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Dharma: जानिए किसी भी देवी- देवता की पूजा करने की संपूर्ण प्रक्रिया

Tue, 31 Jan 2023 09:57 AM IST
विनोद शुक्ला शैली प्रकाश

सार

हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा- पाठ करने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है भगवान की विधि-विधान से पूजा करने पर सभी तरह के फलों की प्राप्ति होती है।
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भगवान की पूजा करने पर हर तरह की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। - फोटो : istock
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विस्तार
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किसी भी देवी या देवता की हम पंचोपचार (5 प्रकार), दशोपचार (10 प्रकार), षोडशोपचार (16 प्रकार), द्वात्रिशोपचार (32 प्रकार), चतुषष्टि प्रकार (64 प्रकार) और एकोद्वात्रिंशोपचार (132 प्रकार) से पूजा करते हैं। इसी में से किसी एक पूजा के भी 5 प्रकार होते हैं- अभिगमन (स्नान-सफाई करना), उपादान (पूजा सामग्री का संग्रह करना), योग (देव की भावना करना), स्वाध्याय (मंत्र या स्त्रोत का पाठ करना, कीर्तन करना) और इज्या (पूजा करना)। इसमें से किसी भी एक उपचार से पूजा करने की 29 तरह की प्रकिया होती है।
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1. ध्यानम् : पहले स्नान आदि से निवृत्त होकर ईष्टदेव का ध्यान करते हैं। 
2. आवाहनं : ध्यान करने के बाद ईष्टदेव की पूजा के लिए उनका आवाहन करते हैं। 
3. पाद्यम् : इसके बाद पाद्यम् अर्थात उनके पैर धोते हैं, उन्हें स्नान कराते हैं। 
4. अर्घ्यम् : जल अर्पण कर जलाभिषेक करते हैं। 

5. आचमनीयम् : आचमन करने के लिए जल अर्पण करते हैं। 
6. गोदुग्धस्नानम् : इसके बाद गाय के दूध से स्नान कराते हैं।
7. दधिस्नानम् : इसके बाद दही से स्नान कराया जाता है। 
 
8. घृत स्नानम् : इसके बाद घी से स्नान कराया जाता है। 
9. मधु स्नानम् : इसके बाद मधु अर्थात शहद से स्नान कराया जाता है। 
10. शर्करा स्नानम् : शक्कर से स्नान कराया जाता है।
11. शुद्धोदक स्नानम् : अब इसके बाद जप करते हुए ताजे जल से स्नान कराया जाता है।

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12. वस्त्रं : अब ईष्टदेव को वस्त्र पहनाएं जाते हैं या अर्पण करते हैं। 
13. यज्ञोपवीतं : वस्त्र के बाद जनेऊ अर्पित करते हैं। 
14. गन्धम् : इसके बाद गंध अथार्त इत्र, सुगंध आदि अर्पण करते हैं। 
15. अक्षतान् : अब अक्षत अर्थात अखंडित चावल अर्पित करते हैं।

16. पुष्पाणि : इसके बाद फूल अर्पित करते हैं।  
17. पत्राणि : शिवजी को बिल्वपत्र और विष्णुजी को तुलसी अर्पित करते हैं। 
18. धूपम् : इसके बाद धूप, अगरबत्ती आदि जलाते हैं। 
19. दीपं : इसके बाद दीपक प्रज्वलित करते हैं। हर देवता के लिए अलग पदार्थ का दीपक होता है।

20. नैवेद्यं : अब अपने ईष्टदेव को दीपदान के बाद हाथ धोकर नैवेद्य अर्पित करते हैं।
21. आचमनीयं : नैवेद्य के बाद आचमन अर्पित करते हैं। 
22. ताम्बुलम् : भोग या नैवेद्य अर्पण करने के बाद ताम्बुल अर्थात पान अर्पण करते हैं।
23. दक्षिणां : अब ईष्टदेव को दक्षिणा के रूप में धन अर्पित करते हैं। 

24. आरती : इसके बाद आरती उतारते हैं। 
25. प्रदक्षिणाम् : आरती के बाद देवता की परिक्रमा करते हैं। 
27. मन्त्र पुष्पाञ्जलि : प्रदक्षिणा के बाद मंत्र और पुष्प अर्पित करते हैं। 
28. क्षमा-प्रार्थना : मंत्र पुष्पांजलि के बाद क्षमा प्रार्थना करें।
29. प्रसादम : अंत में सभी को प्रसाद वितरण करते हैं।

उपरोक्त प्रत्येक स्टेप का एक मंत्र होता है। उस मंत्र को बोलते हुए ही पूजा की जाती है।
 
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