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इस मंदिर में भक्तों को मिलती है अनोखी सजा, नहीं खा सकते प्रसाद, जानें ऐसे ही कुछ नियम

Wed, 16 Jan 2019 12:25 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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बालाजी मंदिर
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भारत में सैकड़ों की संख्या में मंदिर है और हर एक मंदिर में कई रहस्य और चमत्कार छिपे हुए होते हैं। इन्हीं में से एक मंदिर है मेहंदीपुर बालाजी का मंदिर। यह मंदिर राजस्थान के दौसा जिले में स्थित है। इस मंदिर में जो लोग पहली बार जाते हैं यहां का नजारा देखकर दंग रह जाते हैं। जिन भक्तों के ऊपर काली छायी और प्रेत बाधा का साया रहता है उनसे मुक्ति पाने के लिए इस मंदिर में आते हैं। मेंहदीपुर बालाजी के दरबार में पहुंचते ही बुरी शक्ति जैसे भूत, प्रेत, पिशाच खुद ही डर से कांपने लगते हैं। यहां प्रेतात्मा को शरीर से मुक्त करने के लिए उसे कठोर से कठोर दंड दिया जाता है। इस उपचार को देख लें तो आपके रोंगटे खड़े हो जाएं क्योंकि यह इलाज पुलिस की किसी थर्ड डिग्री से कम नहीं होती।

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बालाजी की बायीं छाती में है छिद्र

मेहंदीपुर बालाजी की बायीं छाती में एक छोटा सा छिद्र है। इससे निरंतर जल बहता रहता है। ऐसी मान्यता है कि यह बालाजी का पसीन है। इस मंदिर में तीन देवता विराजते हैं एक तो स्वयं बालाजी, दूसरे प्रेतराज और तीसरे भैरों जिन्हें कप्तान कहा जाता है।

यहां पर चढ़ाया जाता है अलग-अलग प्रसाद

बालाजी मंदिर की खासियत है कि यहां बालाजी को लड्डू, प्रेतराज को चावल और भैरों को उड़द का प्रसाद चढ़ाया जाता  है। कहते हैं कि बालाजी के प्रसाद के दो लड्डू खाते ही भूत-प्रेत से पीड़ित व्यक्ति के अंदर मौजूद भूत प्रेत छटपटाने लगता है और अजब-गजब हरकतें करने लगता है।

मंदिर के है कुछ कड़े नियम

मेंहदीपुर बाला जी के दर्शन करने वालों के लिए कुछ कड़े नियम होते हैं। यहां आने से कम से कम एक सप्ताह पहले लहसुन, प्याज, अण्डा, मांस, शराब का सेवन बंद करना होता है।

घर नहीं ले जा सकते यहां का प्रसाद

आमतौर पर मंदिर में भगवान के दर्शन करने के बाद लोग प्रसाद लेकर घर आते हैं लेकिन मेंहदीपुर बालाजी मंदिर से भूलकर भी प्रसाद को घर लाना चाहिए। ऐसा करने से आपके ऊपर प्रेत साया आ सकता है।

लौटते समय रखनी होती है विशेष सावधानी

बालाजी के दर्शन के बाद घर लौटाते समय यह देख लेना चाहिए कि आपकी जेब या बैग में खाने-पीने की कोई भी चीज न हो। यहां का नियम है कि यहां से खाने पीने की कोई भी चीज घर पर नहीं लानी चाहिए।

यहां के प्रसाद को कहते हैं दर्खावस्त और अर्जी

यहां पर चढ़ने वाले प्रसाद को दर्खावस्त और अर्जी कहते हैं। मंदिर में दर्खावस्त का प्रसाद लगने के बाद वहां से तुरंत निकलना होता है। जबकि अर्जी का प्रसाद लेते समय उसे पीछे की ओर फेंकना होता है। इस प्रक्रिया में प्रसाद फेंकते समय पीछे की ओर नहीं देखना चाहिए।
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जल के छीटें से मिलती है प्रेत साया से मुक्ति

बालाजी जाएं तो सुबह और शाम की आरती में शामिल होकर आरती के छीटें लेने चाहिए। यह रोग मुक्ति एवं ऊपरी चक्कर से रक्षा करने वाला होता है।
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