हिन्दू पंचांग के अनुसार 16 दिसंबर 2019 से खरमास प्रारंभ हो रहा है, जो अगले वर्ष 14 जनवरी 2020 तक रहेगा। खरमास के दौरान मांगलिक कार्य जैसे विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश एवं जनेऊ संस्कार आदि नहीं किए जाते हैं। दरअसल धार्मिक रूप से ये समय अपवित्र होता है। इसलिए इस समय मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
खरमास में क्यों नहीं होते हैं शुभ कार्य
खरमास में सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है और मकर संक्रांति तक इसी स्थिति में रहता है। मान्यता है कि सूर्य जब धनु राशि में होता है तो इस दौरान मांगलिक कार्य शुभ नहीं होते हैं। इस अवधि में सूर्य मलीन (अशुभ) हो जाता है। मलीन सूर्य के कारण इसे मलमास भी कहते हैं।
खरमास से जुड़ी पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार सूर्यदेव सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते रहते हैं। कहते हैं एक बार उनके घोड़े लगातार चलने और विश्राम न मिलने के कारण भूख-प्यास से बहुत थक गए थे। भगवान सूर्यदेव उन्हें एक तालाब के किनारे ले गए, लेकिन तभी उन्हें यह आभास हुआ कि अगर रथ रूका तो यह सृष्टि भी रुक जाएगी।
उधर तालाब के किनारे दो गधे भी मौजूद थे। ऐसे में सूर्य देव को एक उपाय सूझा। उन्होंने घोड़ों को आराम देने के लिए रथ में गधों को जोत लिया। इस स्थिति में सूर्य देव के रथ की गति धीमी हो गई, लेकिन रथ रुका नहीं। इसलिए इस समय सूर्य का तेज कम हो जाता है। इस समय ठंड भी अपने चर्म पर होती है।
खरमास में क्या करें
- शास्त्रों के अनुसार, खरमास की अवधि में भगवत गीता का पाठ करना शुभफलदायी होता है।
- इस अवधि में श्री राम जी की आराधना, कथा वाचन करना शुभ होता चाहिए।
- इस समय दान, पुण्य, जप और भगवान का ध्यान लगाने से कष्ट दूर हो जाते हैं।
- मलमास भगवान शिव की आराधना के लिए शुभ होता है।
- इस अवधि में भगवान विष्णु की पूजा भी करनी चाहिए।