ऐसे हुआ था भगवान दत्तात्रेय का जन्म
पौराणिक मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि एक बार मां पार्वती, लक्ष्मी और माता सरस्वती को अपने पतिव्रत धर्म पर बहुत अधिक अभिमान हो गया था। नारद मुनि तीनों देवियों के इस अभिमान को तोड़ना चाहते थे। वे बारी-बारी से तीनों देवियों के पास गए और उनके सामने माता अनसूया के पतिव्रत धर्म का गुणगान किया। जब तीनों देवियों ने ये सुना तो उन्हें माता अनसूया से ईर्ष्या होने लगी। उन्होंने त्रिदेवों को ये कहा कि वे जाकर माता अनसूया के पतिव्रत धर्म को तोड़ें।
देवियों की जिद में त्रिदेव माता अनसूया के पतिव्रत धर्म को तोड़ने के लिए पहुंच गए। इधर माता अनसूया को इसकी भनक लग गई। उन्होंने अत्रि ऋषि के चरणों का जल उन पर छिड़क दिया। इससे त्रिदेव अपने बाल रूप में आ गए। अब माता अनसूया उन्हें संतान की तरह पालने लगीं। जब तीनों देवियों को अपनी गलती का अहसास हुआ तो तीनों ने माता अनसूया से क्षमा मांगी। माता ने कहा कि इन तीनों ने मेरा दूध पीया है, इसलिए इन्हें बालरूप में ही रहना होगा। यह सुनकर तीनों देवों ने अपने-अपने अंश को मिलाकर एक नया अंश पैदा किया, जिनका नाम दत्तात्रेय रखा गया।