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Karwa Chauth 2022: करवा चौथ की रात सुहागिन महिलाएं क्यों देखती हैं ‘छलनी’ से चांद ?

Thu, 13 Oct 2022 03:07 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
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करवा चौथ में छलनी का महत्व - फोटो : amar ujala
Karwa Chauth mein Chhalni ka Mahatv: आज 13 अक्तूबर यानी गुरुवार को करवा चौथ का व्रत पूरे देश में मनाया जाता है। आज के दिन सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं और करवा माता की पूजा करती हैं। सभी सुहागन महिलाएं करवा चौथ का व्रत बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ रखती हैं। करवा चौथ की रात महिलाओं का व्रत तभी पूरा माना जाता है जब वह चांद और उसके बाद अपने पति को छलनी से देखती हैं और उसके बाद अपने पति के हाथों जल पीकर व्रत खोलती हैं। सुहागिन महिलाएं इस छलनी में पहले दीपक रख चांद को देखती हैं और फिर पति के दर्शन करती हैं। करवा चौथ में छलनी का इसीलिए विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन करवा चौथ में महिलाएं छलनी का उपयोग करके ही चांद की पूजा क्यों करती हैं, इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा जुड़ी है। आइए जानते हैं क्या हैं चंद्र पूजन से जुड़ी पौराणिक कथा। 
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चंद्र पूजन का महत्व - फोटो : Amar Ujala
चंद्र पूजन का महत्व 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा को लंबी आयु का वरदान प्राप्त है। मान्यता है कि चंद्रमा ब्रह्मा जी का रूप माना जाता है। चंद्रमा सुंदरता और प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। उनकी पूजा करने से दीर्घायु प्राप्त होती है। यही कारण है कि करवा चौथ के व्रत में महिलाएं छलनी से चांद को देखकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है।
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छलनी से जुड़ी पौराणिक कथा - फोटो : अमर उजाला।
छलनी से जुड़ी पौराणिक कथा 

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक साहूकार के 7 बेटे और 1 बेटी थी। एक बार साहूकार की बेटी ने अपने पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा लेकिन अत्यधिक भूख की वजह से उसकी हालत खराब होने लगी। जब सातों भाइयों ने अपनी बहन को भूख से तड़पता देखा तो उन्होंने उसे खाना खाने को कहा। लेकिन साहूकार की बेटी ने खाना खाने से मना कर दिया। 

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छलनी से जुड़ी पौराणिक कथा - फोटो : प्रयागराज
लेकिन भाइयों से बहन की ऐसी हालत देखी नहीं गई तो उन्होंने चांद के निकलने से पूर्व ही एक पेड़ पर चढ़कर छलनी के पीछे एक जलता हुआ दीपक रखकर बहन से कहा कि चांद निकल आया है। बहन ने भी भाइयों की बात मान ली और दीपक को चांद समझकर अपना व्रत खोल लिया। लेकिन जैसे ही साहूकार की बेटी ने व्रत खोल वैसे ही ससुराल से उसके पति की मृत्यु की सूचना मिली।
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छलनी से जुड़ी पौराणिक कथा - फोटो : istock
लेकिन इंद्राणी ने उन्हें चौथ की पूजा और व्रत करने को कहा और छलनी से पहले चांद देखने के बाद पति को देखें। ऐसी मान्यता है कि तभी से अपने हाथ में छलनी लेकर बिना छल-कपट के चांद को देखने के बाद पति के दीदार की परंपरा शुरू हुई।
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