करवा चौथ पर चंद्रोदय और पूजा शुभ मुहूर्त
चंद्रोदय यानी चांद निकलने समय रात 8 बजकर 10 मिनट पर है। महिलाओं को इस समय तक निर्जला व्रत रहना है। करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 01 मिनट से 07 बजकर 15 मिनट तक है। करवा चौथ का त्योहार सरगी के साथ शुरू होता है। सरगी करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले खाया जाता है। जो महिलाएं करवा चौथ रखती हैं उनके लिए उनकी सास सरगी बनाती हैं। करवा चौथ की शाम के समय चंद्रोदय से 1 घंटा पहले सम्पूर्ण शिव-परिवार की पूजा की विधिवत पूजा की जाती है।
करवा चौथ चतुर्थी तिथि
चतुर्थी तिथि आरंभ-13 अक्तूबर 2022 को सुबह 01 बजकर 59 मिनट पर
चतुर्थी तिथि का समापन- 14 अक्तूबर 2022 को सुबह 03 बजकर 08 मिनट पर
करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त
13 अक्तूबर को शाम 06 बजकर 01 मिनट लेकर शाम 07 बजकर 15 मिनट तक
अमृतकाल मुहूर्त- शाम 04 बजकर 08 मिनट से शाम 05 बजकर 50 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 21 मिनट से दोपहर 12 बजकर 07 मिनट तक
करवा चौथ पर चंद्रोदय
13 अक्तूबर को रात 08 बजकर 19 मिनट पर
सबसे पहले एक थाली में 4-4 पूड़ी और हलवा 13 जगह पर रखें,उस पर रोली से टीका कर अक्षत छिड़कें। इसे गणेश जी को चढ़ाएं। घर में जिन 13 महिलाओं का आपने आमंत्रित किया है,उन्हें पहले प्रसाद में चढ़ा पूड़ी और हलवा खिलाएं। फिर एक दूसरी थाली में सास मां के लिए खाना परोसें। इस पर एक सोने की लौंग,लच्छा, बिंदी,काजल,बिछिया,बिंदी,मेहंदी,चूड़ा इत्यादि सुहाग के सामान तथा कुछ रुपये रखें। अब एक हाथ से पल्लू को सर पर रखते हुए परोसी हुई थाली को सास मां के सामने रखें। अगर सास मां नहीं हों तो उनकी जगह घर की वयोवृद्ध महिला को यह थाली भेंट कर उनका आशीर्वाद लें। अब आमंत्रित 13 महिलाओं को भी भोजन करवा कर टीका करें। एक प्लेट में सुहाग के सभी सामान एवं कुछ रुपये रखकर उन्हें गिफ्ट करें। फिर देवर या जेठ के एक लड़के को साक्षी बनाकर उसे भी भोजन करवाएं और उसे नारियल और रुपये भेंट करें।
यदि घर पर आमंत्रित 13 सुहागनों को घर पर आमंत्रित करना संभव नहीं हो रहा है तो एक एक थाली में एक आदमी जितना खाया जाने वाला भोजन थाली में निकालें और पूजा पर चढ़ाए गये 4-4 पूड़ी हलवा प्रत्येक थाली में रखें। प्रत्येक 13 थालियों में सुहाग के सामान रखकर उसे आमंत्रित महिलाओं के घर भिजवा दें।आप अपनी सुविधानुसार अथवा परिवार के रिवाज के अनुसार भोजन बना सकती हैं, लेकिन भोजन में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल न करें। इस तरह से आपका उद्यापन पूरा हो जायेगा। अगर ऐसा करना भी संभव नहीं हो रहा है तो किसी सुहागन ब्राह्मणी को भोजन और वस्त्र दान कर उद्यापन कर सकती हैं।
इस बात का ध्यान रखें कि भोजन और दान दिये जाने वाले वस्त्र को पहले भगवान गणेश को अर्पित करें इसके बाद ही ब्राह्मणी को ये वस्तुएं दान दें। अब आप अगले वर्षों में दिन में एक बार चाय अथवा पानी पीकर व्रत जारी रख सकती हैं अथवा व्रत रोक सकती हैं।