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Kalki Jayanti 2024: कल्कि जयंती आज, इतने वर्षों में खत्म हो जाएगा कलयुग, जानिए कल्कि अवतार से जुडी रोचक बातें

Sat, 10 Aug 2024 12:15 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Kalki Jayanti 2024: 10 अगस्त को कल्कि जयंती मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु के कल्कि अवतार की पूजा की जाती है। कल्कि भगवान विष्णु का ऐसा अवतार है, जिसकी पूजा उनके जन्म के पहले से ही की जा रही है।
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कल्कि जयंती 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Kalki Jayanti 2024: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कलयुग के अंत में सावन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को कल्कि अवतार में भगवान विष्णु का जन्म होगा। इसलिए कल्कि जयंती का पर्व हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष 10 अगस्त को कल्कि जयंती मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु के कल्कि अवतार की पूजा की जाती है। कल्कि भगवान विष्णु का ऐसा अवतार है, जिसकी पूजा उनके जन्म के पहले से ही की जा रही है।

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ऐसी है पुराण की मान्यता
कल्कि पुराण हिन्दुओं के विभिन्न धार्मिक और पौराणिक ग्रंथों में से एक हैं यह एक उपपुराण है। इस पुराण में भगवान विष्णु के दसवें तथा अन्तिम अवतार की भविष्यवाणी की गयी है और कहा गया है कि विष्णु का अगला अवतार (महा अवतार) "कल्कि अवतार होगा। महाभारत और कई धर्म ग्रंथों के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी ने हजारों वर्ष पहले भविष्यवाणी की थी कि, जैसे-जैसे कलयुग का समय बीतता जाएगा, धरती पर अत्याचार और पाप भी बढ़ते जाएंगे व्यक्ति में संस्कारों का नाश हो जाएगा, कोई गुरुओं के उपदेशों का पालन नहीं करेगा, वेदों को मानने वाला कोई नहीं होगा और अधर्म अपने चरम पर होगा तब भगवान कल्कि अपने गुरु भगवान परशुराम के निर्देश पर भगवान शिवजी की तपस्या करेंगे और दिव्यशक्तियों को प्राप्त करेंगे। दिव्यशक्तियों को प्राप्त करने के बाद भगवान कल्कि देवदत्त घोड़े पर सवार होकर पापियों का संहार करेंगे और पुन: धर्म की स्थापना करेंगे। इस तरह से कल्कि के जन्म के बाद कलयुग का अंत हो जाएगा और पुन: सतयुग की शुरुआत होगी।

कब होगा भगवान विष्णु का कल्कि अवतार
श्रीमद्भागवत पुराण के 12वें स्कंद के 24वें श्लोक के अनुसार जब गुरु, सूर्य और चंद्रमा एक साथ पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे तब भगवान विष्णु का कल्कि अवतार होगा। कल्कि का अवतरण सावन महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होगा। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, कलयुग के अंत में जब पाप बढ़ जाएगा, तब कल्कि अवतार में जन्म लेकर भगवान पापियों का संहार करेंगे और फिर से धर्म की स्थापना करेंगे। इसके बाद सतयुग की शुरुआत होगी।
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कल्कि अवतार कहां और कब होगा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कलियुग का प्रारंभ 3102 ईसा पूर्व से हुआ था। जब भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वीलोक से विदा लिया तब कलयुग का प्रथम चरण शुरू हो चुका था। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार पृथ्वी पर कलयुग का इतिहास 4 लाख 32 हजार वर्षों का होगा, जिसमें अभी प्रथम चरण चल रहा है। यानी 3102+2023= 5125 साल कलियुग के बीत चुके हैं और 426875 साल अभी शेष हैं। कल्कि पुराण के अनुसार, भगवान कल्कि का जन्म संभल गांव में होगा। उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद के पास संभल गांव है। उनके पिता का नाम विष्णुयश और माता का नाम सुमति होगा। रामजी की तरह भगवान कल्कि के भी चार भाई होंगे और सभी मिलकर धर्म की स्थापना करेंगे। भगवान कल्कि का दो विवाह होंगे, उनकी पत्नियों का नाम लक्ष्मी रूपी पद्मा और वैष्णवी रूपी रमा होगा।
  
कल्कि अवतार का स्वरूप
अग्नि पुराण में भगवान कल्कि अवतार के स्वरूप का चित्रण किया गया है। इसमें भगवान तीर कमान के साथ घुड़सवार करते हुए नजर आते हैं। कल्कि अवतार के बारे में कहा जाता है कि, भगवान का यह स्वरूप 64 कलाओं से परिपूर्ण होगा। भगवान सफेद रंग के घोड़े पर सवार होंगे, जिसका नाम देवदत्त होगा।
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