गर्मी की तपिश से बचने के लिए आपने बेल का शर्बत तो जरूर पिया होगा। इसकी तासीर ठंडी होती है। बेल के पत्तों की तासीर भी ठंडी होती है इसलिए भगवान शिव को बेल और बेल के पत्ते अर्पित किये जाते हैं। नियमित बेल पत्र अर्पित करके भगवान शिव की पूजा करने वाला भगवान शिव का प्रिय होता है। ऐसा व्यक्ति अपनी जन्मपत्री में अशुभ योग लेकर आया है तब भी उससे प्रभावित नहीं होता है।
शिव पुराण में बेल के पेड़ को साक्षात शिव का स्वरूप कहा गया है। महर्षि व्यास के पुत्र सूत जी ने ऋषि मुनियों को समझाते हुए कहा है कि जितने भी तीर्थ हैं उन सबमें स्नान करने का जो फल है वह बेल के वृक्ष के नीचे स्नान करने मात्र से प्राप्त हो जाता है।
गंध, पुष्प, धूप, दीप एवं नैवेद्य सहित जो व्यक्ति बेल के पेड़ की पूजा करता है वह उसे इस लोक में संतान एवं भौतिक सुख मिलता है। ऐसा व्यक्ति मृत्यु के पश्चात शिवलोक में स्थान प्राप्त करने योग्य बन जाता है।
बेल के पेड़ की पूजा करने के बाद जो व्यक्ति एक भी शिव भक्त को आदर पूर्वक बेल की छांव में भोजन करवाता है वह कोटिगुणा पुण्य प्राप्त कर लेता है। शिव भक्त को खीर एवं घी से बना भोजन करवाने वाले व्यक्ति पर महादेव की विशिष्ट कृपा होती है। ऐसा व्यक्ति कभी गरीब नहीं होता है।
शाम के समय बेल की जड़ के चारों ओर दीपक जलाकर भगवान शिव का ध्यान पूजन करने वाला व्यक्ति कई जन्मों के पाप कर्मों के प्रभाव से मुक्त हो जाता है। मृत्यु के पश्चात वह शिव के स्वरूप में मिल जाता है मोक्ष प्राप्त कर लेता है।