गांधी सरोवर से आए सैलाब की रफ्तार का अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं कि केदारनाथ मंदिर के बाहर लगे लोहे का बैरिकैटर टेढ़ा मेढ़ा हो गया। मंदिर का चबूतरा तक ध्वस्त हो चुका है। लेकिन वही सैलाब आस्था की सबसे बड़ी नींव यानी केदारनाथ मंदिर को हिलाने में नाकामयाब रहा।
शिव में आस्था रखने वाले इसे चमत्कार मानते हैं कि जब सैलाब आया तब करीब 40 फुट का एक पत्थर आकर मंदिर के पास ठहर गया। सैलाब का पानी इस पत्थर से टकराकर दो हिस्सों में बंट गया। जिससे मंदिर पर सैलाब का सीधा असर नहीं पड़ा और मंदिर सुरक्षित खड़ा रहा। मंदिर की छत पर लगी आस्था की पताका आसमान पर अब भी लहरा रही है।
एक टीवी चैनल ने मंदिर के अंदर का दृश्य दिखाया है। इस दृश्य में मंदिर के अंदर सैलाब ने जो तबाही फैलाई है उसके निशान अब भी दिख रहे हैं। शंकराचार्य की मूर्ति को क्षति पहुंची है। लेकिन मंदिर के अंदर मौजूद नंदी की प्रतिमा को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
मंदिर के बाहर भी नंदी की प्रतिमा है, वह भी सुरक्षित है। ताज्जुब की बात तो यह है कि 16 तारीख से शिवलिंग की पूजा नहीं हुई है फिर भी शिवलिंग के माथे पर बेलपत्र मौजूद हैं। शिवलिंग का आधा भाग मलवे में दबा है, मानो शिव समाधि में लीन बैठे हों।