अब तक आप यमलोक के मार्ग की कठिनाईयां और धरती पर किए गए पापों की यमलोक में कैसी सजा है पढ़ चुके हैं। आज के अंक में यमलोक के मार्ग में आने वाली महाभयानक नदी जिसके किनारे हड्डियों से बनें हैं।
नदी में जल की जगह रक्त बहता है। इस नदी में ऐसे जीव निवास करते हैं जो पापी मनुष्य चबा-चबा कर खाते हैं और यम के दूत नदी पार करवाने के लिए नाक में कील फंसाकर पापी मनुष्य के प्रेतात्मा को आकाश मार्ग से खींचकर ले जाते हैं।
पापियों को देखते ही यमलोक की नदी को जाने क्या हो जाता है
इस नदी को पार करने का मात्र एक साधन नाव है जो पुण्य के प्रभाव से प्रेतात्मा को प्राप्त होता है। गरूड़ पुराण में बताया गय है कि जो व्यक्ति एकादशी तिथि को व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा एवं उनके निमित्त दान करता है उसे वैतरणी नदी को पार करने में जरा भी कठिनाई नहीं आती है। प्रेतात्मा को इस नदी को देखकर डर भी नहीं लगता है।
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वैतरणी नदी को पार करने के लिए दान में सबसे उत्तम दान गौदान को माना गया है। गुरूड़ पुराण के अनुसार काले रंग की गाय संक्रांति, ग्रहण, अमावस्या, अक्षय तृतीया के दिन किसी ब्राह्मण को श्रद्घा पूर्वक देने वाले को वैतरणी नदी पार करने में कोई कष्ट नहीं होता है साथ ही यमलोक के मार्ग में भी इन्हें यमदूत कष्ट नहीं देते हैं।