होलाष्टक के पहले दिन यानी अष्टमी को होलिका दहन वाले स्थान पर गोबर, गंगाजल आदि से लिपाई की जाती है। साथ ही वहां पर होलिका का डंडा लगा दिया जाता था। जिनमें एक को होलिका और दूसरे को प्रह्लाद का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन करते समय प्रह्लाद को अग्नि से बाहर निकालकर उनकी शीतल जल से पूजा की जाती है।
उग्र रहते हैं सभी ग्रह
होलाष्टक के दौरान अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र स्वभाव में रहते हैं। इन ग्रहों के उग्र होने के कारण मनुष्य की मानसिक स्थिति पर नकारात्मक बदलाव आता है जिससे उसकी निर्णय लेने की क्षमता भी कमजोर हो जाती है जिसके कारण कई बार उससे गलत निर्णय भी हो जाते हैं। इस कारण हानि की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए जनमानस को इन आठ दिनों में महत्वपूर्ण कार्यों का निर्णय लेने से बचना चाहिए और यदि जरूरी हो तो बहुत अधिक सतर्क रहकर निर्णय लेने चाहिए।
Holashtak 2024: आज से शुरू हो रहे हैं होलाष्टक, इन आठ दिनों में भूलकर भी न करें ये काम
होलाष्टक में क्या न करें
किसी भी शुभ कार्य में सफलता के लिए ग्रहों का मजबूत होना जरूरी है। इसलिए इन दिनों में ग्रहों की कमजोर स्थिति की वजह से मांगलिक कार्य न करने की सलाह दी जाती है।इस समय विशेष रूप से विवाह, वाहन खरीद, नए निर्माण व नए कार्यों को आरंभ नहीं करना चाहिए। अर्थात् इन दिनों में किए गए कार्यों से कष्ट, अनेक पीड़ाओं की आशंका रहती है तथा विवाह आदि संबंध विच्छेद और कलह का शिकार हो जाते हैं या फिर अकाल मृत्यु का खतरा या बीमारी होने की आशंका बढ़ जाती है।
क्या करें
शास्त्रों में उल्लेख है कि इन दिनों में दान करने से तीर्थों में स्न्नान करने जितना पुण्य फल मिलता है। इन आठ दिनों में ईश्वर के निमित्त जो पूजा-पाठ, व्रत,दान-स्न्नान आदि किए जाते हैं,उनका अक्षय फल मिलता है और प्रभु की भक्ति करने वाले के सभी पाप मिट जाते हैं। इस दौरान जरूरतमंद लोग, गरीबों, ब्राह्मणों, बीमार पशुओं की सेवा करने का बहुत महत्व है। होलाष्टक में दान के साथ ही भगवान विष्णु के मंत्र जाप करना भी लाभकारी माना गया है। इसलिए इस दिनों के चलते व्यक्ति को तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मछली, अंडा और मांस-मदिरा आदि से दूर रहना चाहिए और शुद्ध शाकाहारी भोजन करने का प्रयत्न करना चाहिए।