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चैत्र नवरात्रि से शुरू होगा हिंदू नववर्ष, जानिए इसकी 10 बड़ी बातें

Tue, 02 Apr 2019 05:22 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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हिंदू नववर्ष चैत्र नवरात्रि 2019
चैत्र नवरात्रि से नया हिंदू वर्ष आरम्भ हो जाता है। इसी के साथ नए विक्रम संवत 2076 भी शुरू हो जाएगा। 6 अप्रैल 2019 से नया हिन्दू कैलेंडर शुरू होगा। आइए जानते हैं हिंदू नववर्ष की खास बातें...
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हिंदू नववर्ष की 10 बड़ी बातें
दुनिया के तमाम देशों में नया साल व्यक्ति विशेष, घटना, वर्ग, सम्प्रदाय या देश के गौरव से जुड़ी किसी घटना पर आधारित होता है। एक भारतीय नववर्ष ही है जिसकी गणना और निर्धारण, तारों, ग्रहों, नक्षत्रों, चांद, सूरज आदि की गति का अध्ययन कर, छह ऋतुओं और 12 महीनों के हिसाब से तय हुई है। 
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सूर्य-चंद्र और ग्रह-नक्षत्रों की गति पर आधारित महीनो का नाम रखा गया है। जैसे चित्रा नक्षत्र के आधार पर चैत्र, विशाखा के आधार पर बैसाख, ज्येष्ठा के आधार पर ज्येष्ठ, उत्तराषाढ़ा पर आषाढ़, श्रवण के आधार पर श्रावण आदि। 

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भारतीय विद्वानों और वैदिक मुनियों ने हजारों साल पहले बता दिया था कि अमुक दिन, अमुक समय पर सूर्यग्रहण होगा। युगों बाद भी यह गणना सही और सटीक साबित हो रही है।
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तिथि घटे या बढ़े, लेकिन सूर्यग्रहण सदैव अमावस्या को होगा और चंद्रग्रहण सदैव पूर्णिमा को ही होगा। इस आधार पर दिन-रात, सप्ताह, पखवाड़ा, महीने, साल और ऋतुओं का निर्धारण हुआ। 
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बारह महीनों और छह ऋतुओं के चक्र यानी पूरे वर्ष की अवधि को संवत्सर नाम दिया। 
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भारतीय परंपरा में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण तिथि है। ब्रह्मपुराण में उल्लेख है कि चैत्र प्रतिपदा को ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। जिस दिन दुनिया अस्तित्व में आई, उसी दिन प्रतिपदा मानी गई।

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गणना का आधार सूर्य के स्थान पर चंद्रमा को बनाया गया। आज भी ग्रामीण इलाकों में लोग रात के चंद्रमा की गति देखकर समय व तिथि का अनुमान सहज ही लेते हैं। 

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नव संवत्सर 2076
संवत् भारतवर्ष के सम्राट विक्रमादित्य ने शुरु किया था। धर्म संसद ने नया संवत चलाने का अधिकार दिया। इसके बाद भारत की सीमाओं को सुरक्षित कर, राष्ट्र ने अपने प्रिय सम्राट के नाम पर विक्रमी संवत शुरू करने का अधिकार दिया।

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चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के जिस दिन (वार) से विक्रमी संवत शुरू होता है, वही इस संवत का राजा होता है। सूर्य जब मेष राशि में प्रवेश करता है, तो वह संवत का मंत्री होता है। विक्रम संवत समस्त संस्कारों, पर्वों एवं त्योहारों की रीढ़ माना जाता है। समस्त शुभ कार्य इसी पंचांग की तिथि से ही किए जाते हैं।
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इस दिन से चैत्र नवरात्रों का आरंभ, भगवान राम का राज्यारोहण, युधिष्ठिर का राज्याभिषेक, संत झूलेलाल जयंती, गुरु अंगददेव का जन्म, आर्यसमाज की स्थापना आदि कई गौरव के प्रतीक जुड़े हैं।  
 
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