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Hanuman Chalisa: हनुमान चालीसा की इन 5 चौपाइयों के जाप से दूर भाग जाती हैं सभी परेशानियां

Wed, 28 Jul 2021 06:48 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Hanuman Chalisa: हनुमानजी कलयुग के सबसे पूजनीय देवों में गिने जाते हैं
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Hanuman Chalisa Lyrics Benefits: हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा और अपने ईष्ट देवों के लिए मंत्रों का उच्चारण करना बहुत शुभ फलदायक होता है। हिंदू धर्म में भगवान हनुमान सबसे ज्यादा पूजे जाने वाले देवता हैं। भगवान हनुमान को कलयुग का देवता माना गया है। मान्यताओं के अनुसार आज भी राम भक्त हनुमान इस पृथ्वी पर सशरीर भ्रमण करते हैं। जो भी भक्त सच्चे मन से उन्हें याद करता है वे फौरन ही उसके कष्टों को हरने के लिए आ जाता हैं। हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ बहुत ही लाभदायक माना गया है,क्योंकि मनुष्य के जीवन की सभी समस्याओं का समाधान हनुमान चालीसा का पाठ करने में है। शास्त्रों में कहा है कि जो भी व्यक्ति नियमित रूप से रोजाना सच्चे मन से बजरंग बली को याद करता है और हनुमान चालीसा का पाठ करता है उसके जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती है। ज्योतिष में कहा गया कि अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि अशुभ हैं तो नियमित हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य ही करना चाहिए।
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हनुमानजी कलयुग के सबसे पूजनीय देवों में गिने जाते हैं और गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा का पाठ हजारो मंत्रों के बराबर प्रभावशाली है। वैसे तो हनुमान चालीसा का पूरा पाठ बहुत ही उपयोगी माना गया है, लेकिन इसकी कुछ चौपाईयों को भी अगर नियमित जाप किया जाय तो बजरंग बली सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं।


1. भूत-पिशाच निकट नहीं आवे। महाबीर जब नाम सुनावे।।
हनुमान चालीसा की इस चौपाई को बहुत ही उपयोगी माना गया है। अगर किसी व्यक्ति को हमेशा किसी न किसी चीज का भय सताता रहता है तो नियमित इस चौपाई का जाप करने से मन से भय समाप्त हो जाता है।
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2. नासे रोग हरे सब पीरा। जो सुमिरे हनुमंत बलबीरा।।
जो व्यक्ति हमेशा किसी न किसी तरह की बीमारियों से पीड़ित रहता हो उसे नियमित रूप से इस चौपाई को सुबह और शाम के वक्त हनुमान जी का नाम लेकर जाप करना चाहिए।

3. अष्ट-सिद्धि नवनिधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।।
हनुमान चालीसा की ये चौपाई सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना गयी है क्योंकि हनुमान जी आठ सिद्धि और नौ निधियों को देने वाले भगवान हैं। इन ये वरदान माता सीता ने दिया है। अगर किसी व्यक्ति को जीवन में शक्तियों को प्राप्त करना है तो हनुमान चालीसा की इस चौपाई का पाठ जरूर करना चाहिए। 

4. बिद्यबान गुनी अति चातुर। रामकाज करीबे को आतुर।।
अगर किसी व्यक्ति को ज्ञान, बुद्धि, विवेक, बुद्धि और धन दौलत चाहिए तो हनुमान चालीसा की इस चौपाई का नियमित जाप करना चाहिए। विद्या और चतुराई के लिए तो यह चौपाई बहुत ही उपयोगी है।

5. भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्रजी के काज संवारे।।
रामभक्त हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए और उनकी कृपा पाने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करना बहुत उपयोगी होता है। ऐसे में अगर आप शत्रुओं से परेशान हैं या किसी कार्य में बार-बार असफलता प्राप्त हो रही है तो इस चौपाई का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए। हनुमान चालीसा की चौपाई से शत्रुओं का नाश अवश्य हो जाता है।

हनुमान चालीसा Hanuman Chalisa

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निजमनु मुकुरु सुधारि।

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बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महावीर विक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन वरन विराज सुवेसा।
कानन कुण्डल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै।
शंकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग वन्दन।।

विद्यावान गुणी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
विकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कवि कोविद कहि सके कहाँ ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना।
लंकेश्वर भये सब जग जाना।।
जुग सहस्र योजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डरना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिनके काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोई अमित जीवन फल पावै।।

चारों युग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस वर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को भावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
अन्त काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेई सर्व सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहिं बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा।।

दोहा 
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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