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Guru Gobind Singh Ji Jayanti 2020: एक महान योद्धा और कवि थे सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह

Fri, 03 Jan 2020 07:05 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
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guru gobind singh
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आज सिखों के दसवें गुरु गोबिन्द सिंह की जयंती है। वे सिख धर्म के अंतिम गुरु थे। सिख धर्म में गुरु गोविंद सिंह का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब को गुरु के रूप में स्थापित किया किया। वे सिख धर्म के 9वें गुरु तेगबहादुर के पुत्र थे। शौर्य और साहस के प्रतीक गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को बिहार के पटना में हुआ। वहीं 7 अक्टूबर, 1708 वे नांदेड साहिब में दिव्य ज्योति में लीन हो गए। आइए इस अवसर पर जानते हैं उनके जीवन के बारे में...

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गुरु गोविंद सिंह एक आध्यात्मिक गुरु होने के साथ-साथ एक निर्भयी योद्धा, कवि और दार्शनिक भी थे। उन्होंने मुगलों से धर्म की रक्षा के लिए खालसा पंथ की स्थापना की थी। गुरु गोविंद सिंह के जन्म दिवस को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। उनकी जयंती पर आप उनके प्रेरणादायी उपदेशों को पढ़ सकते हैं। उन्होंने के द्वारा कई रचनाएं भी लिखी गई हैं।

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सिखों के पांच ककार धारण करने का आदेश 
सिखों के लिए 5 चीजें- बाल, कड़ा, कच्छा, कृपाण और कंघा धारण करने का आदेश गुरु गोबिंद सिंह ने ही दिया था। इन चीजों को 'पांच ककार' कहा जाता है, जिन्हें धारण करना सभी सिखों के लिए अनिवार्य होता है।
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गुरु गोविंद सिंह की शोभायात्रा में शामिल लोग - फोटो : amar ujala
गुरु गोबिंद सिंह के जीवन से मिलती है ये प्रेरणा 
गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें जीवन में कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए, चाहे परिस्थितियां कितनी भी बुरी क्यों न हो। हमेशा अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए काम करते रहना चाहिए। आप हमेशा कुछ नया सीखते रहेंगे, तो आप में सकरात्मकता का संचार होगा। 
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