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Govinda Dwadashi 2023: गोविन्द द्वादशी आज, जानिए महत्व, पूजाविधि और मंत्र

Sat, 04 Mar 2023 12:55 PM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन,वास्तुविद

सार

हिंदू पंचांग के अनुसार 3 मार्च, शनिवार के दिन गोविंद द्वादशी मनाई जा रही है। द्वादशी तिथि भगवान विष्णु की उपासना के श्रेष्ठ मानी गई है। द्वापर युग में श्रीकृष्ण के मांगने पर बालक बर्बरीक ने इसी दिन अपने शीश का दान किया था।
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Govinda Dwadashi 2023: खाटूश्यामजी मंदिर में फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष में बड़े मेले का आयोजन होता है,जिसमें देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते हैं।
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विस्तार
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फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली द्वादशी को "गोविंद द्वादशी" नाम से जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार 3 मार्च, शनिवार के दिन गोविंद द्वादशी मनाई जा रही है। द्वादशी तिथि भगवान विष्णु की उपासना के श्रेष्ठ मानी गई है। द्वापर युग में श्रीकृष्ण के मांगने पर बालक बर्बरीक ने इसी दिन अपने शीश का दान किया था। कलयुग में शीश के दानी को ही बाबा खाटूश्याम के रूप में पूजा जाता है। खाटूश्यामजी मंदिर में फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष में बड़े मेले का आयोजन होता है,जिसमें देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते हैं। लोगों की मान्यता है कि यहां आकर श्यामजी के दर्शन करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है एवं समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी दिन पुरी के जगन्नाथ मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर, तिरुमाला तिरुपति बालाजी मंदिर और वेंकेटेश्वर स्वामी मंदिर में धूमधाम से उत्सव मनाया जाता है।  

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गोविन्द द्वादशी का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि यदि एकादशी का व्रत न रख पाएं तो द्वादशी का व्रत रख लेने से उसी के समान फलों की प्राप्ति भी होती है। गोविंद द्वादशी पर भगवान विष्णु की उपासना करने से व्यक्ति के सभी कष्ट एवं व्याधियों का नाश होता है। वेद व पुराणों के अनुसार इस द्वादशी का पूजन एवं व्रत इत्यादि करने से "अतिरात्र याग" नामक यज्ञ का फल प्राप्त होता है। गोविंद द्वादशी का व्रत रखने पर घर-परिवार को धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, साथ ही संतान प्राप्ति के लिए भी यह व्रत रखा जाता है। इस व्रत के प्रभाव से मानव जीवन के समस्त रोगादि छूट जाते हैं और अंत में वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती।

पूजाविधि
इस द्वादशी पर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की पूजा की जाती है इसीलिए इसे नरसिंह द्वादशी भी कहते हैं। इस दिन प्रात:काल संकल्प के साथ व्रत रखें एवं षोडशोपचार या पंचोपचार के द्वारा भगवान विष्णु का विधिवत पूजन करें। चंदन, अक्षत, तुलसी दल व पुष्प को श्री गोविंद व श्री हरि बोलते हुए भगवान को अर्पित करने चाहिए। इसके बाद भोग लगाकर आरती करें।
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गोविंद द्वादशी मंत्र
गोविंद द्वादशी के दिन भगवान श्री विष्णु के मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। जगत का पालन करने वाले श्री गोविंद का स्वरूप शांत और आनंदमयी है। इनका स्मरण करने से भक्तों के जीवन के समस्त संकटों का नाश होता है। इस दिन इन मंत्रों से भगवान का पूजन करना चाहिए।

"ॐ नारायणाय नम:"
"ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
"ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि। "
 " ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:"

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