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Govardhan puja 2020: जानिए गिरिराज भगवान (गोवर्धन पर्वत) के साथ क्यों की जाती है गाय की पूजा

Sun, 15 Nov 2020 06:34 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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गोवर्धन पूजा 2020 - फोटो : अमर उजाला
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कार्तिक मास की प्रतिपदा तिथि यानि दिवाली के अगले दिन गोवर्धन का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष गोवर्धन पूजा 15 नवंबर 2020 दिन रविवार के दिन की जाएगी। इस दिन घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की अल्पना बनाई जाती है। गोबर से ही ग्वाल-बाल और गायों, बछड़ों की आकृति भी बनाई जाती है और कृष्ण जी के समक्ष सभी की पूजा अर्चना करते हैं। इस दिन लोग गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा भी करते हैं। गोवर्धन पूजा के दिन विशेषतौर पर गायों की पूजा और सेवा की जाती है। गायों को मिष्ठान खिलाए जाते हैं फूल माला पहनाकर उनकी आरती की जाती है। तो चलिए जानते हैं कि गोवर्धन पूजा के दिन गायों की पूजा का क्या महत्व है।

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गाय की पूजा का महत्व (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pti
सनातन धर्म में गाय का महत्व
हिंदू सनातन धर्म में गायों की गौमाता का दर्जा दिया गया है। गाय में देवी-देवताओं का वास माना  जाता है, इसलिए सनातन धर्म में भोजन का पहला भाग प्रतिदिन गाय के लिए निकालने को कहा गया है। इससे सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है। जानते हैं कि गोवर्धन पूजा के दिन गायों की पूजा का महत्व

गोवर्धन पर गायों की पूजा का महत्व(प्रतीकात्मक तस्वीर)
गायों की पूजा का महत्व
शास्त्रों के अनुसार गाय को उसी प्रकार पवित्र होती है जिस तरह से नदियों में गंगा को पवित्र माना गया है। जिस प्रकार से धन की देवी मां लक्ष्मी सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं। उसी प्रकार से गौ माता हमें दूध स्वास्थ का धन प्रदान करती हैं। इसलिए गोवर्धन पूजा के दिन गोधन यानि गौ माता की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। माना जाता है कि इस दिन गाय की पूजा करने से मनुष्य के समस्त पापों का नाश हो जाता है, जिससे मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

 
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गिरिराज जी - फोटो : अमर उजाला
इस दिन गोवर्धन पर्वत और कृष्ण जी की पूजा के साथ इंद्रदेव की पूजा को भी स्थान दिया जाता है, क्योंकि अभिमान समाप्त होने के पश्चात इंद्रदेव ने अपनी भूल स्वीकार कर कृष्ण जी से क्षमा मांग ली थी। तब कृष्ण जी ने इंद्रदेव की पूजा को भी गोवर्धन पूजा में मान्य किया। 
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