भगवान ने जिस कण से ब्रह्माण्ड की रचना की है उससे करीब तीन कदम की दूरी पर अब हम रह गए हैं। यानी अब भगवान तक पहुंचने में भी तीन कदम की दूरी है। दुनिया के लिए अब तक रहस्य बने गॉड पार्टिकल या हिग्स बोसोन कणों को जेनेवा स्थित दुनिया की सबसे बड़ी, महंगी और तकनीकी दृष्टि से सबसे जटिल मशील वाली प्रयोगशाला में खोज लेने का दावा किया गया है।
इसी के साथ ब्रह्माण्ड के बारे में ढ़ेर सारी जानकारियां मिलने की संभावना बढ़ गई है और लगता है कि वैज्ञानिक सूझ-बूझ की दिशा में इंसान ने आगे कदम बढ़ा दिए हैं। कैसे ब्रह्माण्ड का निर्माण हुआ? कैसे धरती और अन्य ग्रहों का विकास हुआ? कैसे आधुनिक संसार की सभी चीजें क्रमिक रूप से बड़ी हुई?
इन सभी के लिए अब तक के सिद्घांतों की प्रायोगिक पुष्टि के लिए गॉड पार्टिकल को अहम माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्रह्माण्ड के अस्तित्व में आने से पहले सब कुछ हवा में तैर रहा था। किसी का कोई आकार या वजन नहीं था।
महाविस्फोट के बाद उत्पन्न कण प्रकाश की गति से इधर-उधर भाग रहे थे। तभी हिग्स बोसोन भारी उर्जा लेकर आया और इसके संपर्क में आने वाले कण आपस में जुडने लगे। वैज्ञानिकों ने 11 मूल कण तो खोज लिए लेकिन 12वें कण को खोज नहीं पाए।
ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी पीटर हिग्स हिग्स बोसोन की परिकल्पना प्रस्तुत की इस आधार पर 12वें कण के रूप में हिग्स बोसोन के अस्तित्व को स्वीकार कर लिया। इस कण को ब्रह्म कण, ईश्वर का कण, भगवान आदि उपलब्धियों से नवाजा जा रहा है।
पस्तुत अंश विपुल विनोद और नमन विनोद की पुस्त गॉड पार्टिकल का रहस्य से लिया गया है। हिन्द पॉकेट बुक्स से प्रकाशित इस पुस्तक में गॉड पार्टिक से जुड़े रहस्यों और इन पर हुए वैज्ञानिक शोध का उल्लेख किया गया है। अध्यात्म के साथ विज्ञान में रूचि रखने वाले पाठकों को यह पुस्तक पसंद आएगी। पुस्तक के कुछ अंशों को पढ़कर पाठक रोमांचित हो सकते हैं।