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Ekadashi 2022: एकादशी तिथि पर क्यों नहीं खाया जाता है चावल ? जानिए इसके पीछे की कथा और महत्व

Wed, 02 Feb 2022 11:12 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rice On Ekadashi: शास्त्रों में बताया गया कि एकादशी पर व्रत, जप-तप और दान-पुण्य करने से मनुष्य जीवन मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है। शास्त्रों में एकादशी व्रत को करने का विशेष नियम बताए गए हैं जिनका पालन करने से व्रत का पूरा फल मिलता है।
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ekadashi 2022: एकादशी पर भगवान विष्णु के निमित्त व्रत-पूजा एवं तिल दान करने से मनुष्य को सभी सुखों की प्राप्ति होती है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Rice On Ekadashi: हिंदू पंचांग के अनुसार एक माह में दो पक्ष होते हैं शुक्ल और कृष्ण पक्ष। हर एक पक्ष में एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस तरह के एक महीने में दो बार एकादशी का व्रत रखा जाता है। एकादशी भगवान विष्णु को बहुत ही प्रिय होती है इसी कारण से हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले लोग इस व्रत को रखकर भगवान विष्णु को प्रसन्न करते हैं। एकादशी की तिथि को हरि वासर या हरि का दिन भी कहा जाता है। एकादशी का व्रत रखने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और विष्णु भगवान की कृपा प्राप्ति होती। शास्त्रों में बताया गया कि एकादशी पर व्रत, जप-तप और दान-पुण्य करने से मनुष्य जीवन मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है। शास्त्रों में एकादशी व्रत को करने का विशेष नियम बताए गए हैं जिनका पालन करने से व्रत का पूरा फल मिलता है। एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना जाता है। आइए जानते हैं सभी तिथियों में सबसे सर्वश्रेष्ठ मानी जाने वाली एकादशी तिथि पर क्यों नहीं खाया जाता है चावल, क्या है इसके पीछे की कथा?
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पौराणिक कथा: एकादशी पर क्यों नहीं खाते हैं चावल ?
पौराणिक मान्यता है कि एकादशी के दिन चावल खाने से प्राणी रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म पाता है, किन्तु द्वादशी को चावल खाने से इस योनि से मुक्ति भी मिल जाती है। कथा के अनुसार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन हुए इसलिए चावल और जौ को जीव माना जाता है। जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया,उस दिन एकादशी तिथि थी। अतः इनको जीव रूप मानते हुए एकादशी को भोजन के रूप में ग्रहण करने से परहेज किया गया है ,ताकि सात्विक रूप से विष्णु प्रिया एकादशी का व्रत संपन्न हो सके।

ज्योतिषीय मान्यता 
वहीं दूसरी तरफ ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार चावल में जल तत्व की मात्रा काफी अधिक पाई जाती है। जल पर चन्द्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है। चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है इससे मन विचलित और चंचल होता है। मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा आती है। एकादशी व्रत में मन का पवित्र और सात्विक भाव का पालन अति आवश्यक होता है इसलिए एकादशी के दिन चावल से बनी चीजें खाना वर्जित कहा गया है।
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साल 2022 में कब-कब एकादशी और उनकी तिथियां
 
दिनांक  दिन  एकादशी 
13 जनवरी गुरुवार पौष पुत्रदा एकादशी
28 जनवरी  शुक्रवार षटतिला एकादशी
12 फरवरी शनिवार जया एकादशी
27 फरवरी रविवार विजया एकादशी
14 मार्च सोमवार आमलकी एकादशी
28 मार्च सोमवार पापमोचिनी एकादशी
12 अप्रैल मंगलवार कामदा एकादशी
26 अप्रैल मंगलवार वरुथिनी एकादशी
12 मई गुरुवार मोहिनी एकादशी
26 मई गुरुवार अपरा एकादशी
11 जून शनिवार निर्जला एकादशी
24 जून शुक्रवार योगिनी एकादशी
10 जुलाई रविवार देवशयनी एकादशी
24 जुलाई रविवार कामिका एकादशी
08 अगस्त सोमवार श्रावण पुत्रदा एकादशी
23 अगस्त मंगलवार अजा एकादशी
06 सितंबर मंगलवार परिवर्तिनी एकादशी
21 सितंबर बुधवार इन्दिरा एकादशी
06 अक्तूबर गुरुवार पापांकुशा एकादशी
21 अक्तूबर शुक्रवार रमा एकादशी
04 नवंबर शुक्रवार देवोत्थान एकादशी
20 नवंबर रविवार उत्पन्ना एकादशी
03 दिसंबर शनिवार मोक्षदा एकादशी
19 दिसंबर सोमवार सफला एकादशी
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