नवरात्र के नौ दिन विशेष फलदायी माने गए हैं। इन दिनों में माता की पूजा और भक्ति का फल जल्दी मिलता है। इसका कारण यह माना है कि मां नवरात्र के नौ दिनों में पृथ्वी पर आकर भक्तों के बीच रहती हैं।
इसलिए मां को खुश करने के लिए भक्त विधि-विधान पूर्वक आरती, पूजा एवं दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। मान्यता है कि दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ करने से माता की कृपा प्राप्त होती है। लेकिन विधि-विधान पूर्वक दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ किया जाए तो लगभग डेढ से दो घंटे का समय लगता है।
सांसारिक जीवन में लोगों के पास कई प्रकार के काम होते हैं ऐसे में जरूरी नहीं कि आपके पास हर दिन इतना समय हो कि आप पूरा सप्तशती का पाठ कर सकें। इस समस्या का समाधान दुर्गा सप्तशती के अंत में दिया गया है जो सिद्घ कुंजिकास्तोत्र के नाम से जाना जाता है।
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भगवान शिव ने पार्वती को बताया है कि जो व्यक्ति संपूर्ण दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर सकता है वह केवल सिद्घ कुंजिकास्तोत्र का पाठ कर ले। इसके पाठ मात्र से कवच, कीलक, अर्गलास्तोत्र सहित संपूर्ण दुर्गासप्तशती के पाठ का फल मिल जाता है। कुंजिका स्तोत्र सिद्घ मंत्रों द्वारा निर्मित है जिसके हर शब्द प्रवावशाली हैं। इसके हर मंत्र स्वयं सिद्घ हैं इसलिए इसे अलग से सिद्घ करने की भी जरुरत नहीं है।