Astro Tips: वैदिक ज्योतिष शास्त्र का जन्म वेदों से हुआ है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में आकाशमंडल में ग्रहों, नक्षत्रों और राशियों के संयोजन और संबंधों का अध्ययन करते हुए पृथ्वी और यहां पर रहने वाले लोगों के जीवन में होने वाले प्रभावों के बारे में विश्लेषण करते भविष्यवाणी की जाती है। किसी व्यक्ति के जन्म लेते समय ही उसी समय व्यक्ति के भाग्य और कर्म का निर्धारण लग्न के माध्यम से हो जाता है। व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों और नक्षत्रों के संयोग से कई तरह के शुभ और अशुभ योगों का निर्माण होता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में शुभ योग बनते हैं तो जातक के जीवन में सुख-समृद्धि और संपन्नता का वास होता है, वहीं जब कुंडली में अशुभ योग बनता है तो व्यक्ति को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब जातक के जीवन में परेशानियां आती हैं और वह इन परेशानियों से निजात पाने के लिए ज्योतिषीय उपाय के बारे में विचार करता है। लेकिन कई बार जाने-अनजाने में गलत ज्योतिषीय उपाय करने पर व्यक्ति के जीवन में मुसीबतें कम होने के बजाय बढ़ने लगती हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे ज्योतिषीय उपाय के बारे में बताने जा रहे हैं जिसको करने से पहले कियी योग्य ज्योतिषी की सलाह अवश्य ही लेनी चाहिए।
- अक्सर देखने को मिलता है जब कोई व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र या घर-परिवार के बीच आने वाली समस्याओं के चलते मानसिक रूप से परेशान रहता है तो आम लोग उसे मोती पहने की सलाह देते हैं। यानी मन के कारक चंद्रमा के कमजोर होने पर मोती पहनने को बोला जाता है। लेकिन वैदिक ज्योतिष के अनुसार हर किसी को मोती नहीं पहनना चाहिए। दरअसल जब कोई जातक मानसिक रूप से परेशान रहता हो और उसका चंद्रमा नीच का हो तो व्यक्ति कुछ समय के बाद अवसाद से पीड़ित होता है।
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- वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब किसी जातक की कुंडली के चौथे या दसवें भाव में गुरु हो तो उसे मंदिर में दान नहीं करना चाहिए।
- अगर किसी जातक की कुंडली में उसका बुध कमजोर हो तो ऐसे जातकों को घर पर मनी प्लांट का पौधा नहीं लगाना चाहिए।
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- वहीं जब किसी जातक की कुंडली में शनिदेव कमजोर हो या फिर अशुभ भाव में हो तो घर में कांटेदार पौधे नहीं लगाना चाहिए।
- ऐसे जातकों को कभी भी तांबे का दान नहीं करना चाहिए जिसकी कुंडली के आठवें भाव में सूर्यदेव स्थित हो।
- जब किसी जातक की कुंडली में गुरु सप्तम भाव में हो तो ऐसे लोगों को पीले वस्त्रों का दान करने से बचना चाहिए। इसे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है।
- जब किसी जातक की कुंडली में गुरु नीच भाव में हो तो ऐसे जातकों को पुखराज नहीं धारण करना चाहिए।