हिंदू धर्म में छठ पूजा का बहुत महत्व है। दीपावली के छठे दिन मनाया जानेवाले इस कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाने वाले छठ महापर्व पर छठी मैया की पूजा के साथ सूर्य उपासना जा भी विधान है। आमतौर पर तो लोग उगते हुए सूर्य को ही प्रणाम करते हैं, लेकिन छठ पूजा में डूबते सूर्य की भी आराधना होती है। कार्तिक मास की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक मनाया जाने वाला छठ महापर्व चार दिनों तक चलता है। आइए जानते हैं सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है। सूर्य को अर्घ्य देने का क्या आशय है।
आखरी सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है
छठ महापर्व पर सूर्य को अर्घ्य देने का अभिप्राय सूर्यदेव को आभार व्यक्त करने कि एक परंपरा है। हम ये कह सकते हैं कि जीवन और पृथ्वी का आधार सूर्य ही है। प्राचीनकाल में ऋषि-मुनि नित्य सूर्य को अर्घ्य अन्य पूजा की शुरुआत करते थे। सूर्य को जल अर्पित करने का अर्थ है कि हे सूर्य देवता, हम सच्चे हृदय से आपके आभारी हैं और यह भावना प्रेम से उत्पन्न हुई है। छठ पूजा में सूर्य को दूध से भी अर्घ्य देने की परंपरा है, इसका अर्थ है कि दूध पवित्रता का प्रतीक है।
छठ पर सूर्य को आभार करते हैं आभार प्रकट
सूर्य को आभार व्यक्त करना ही छठ पूजा का उद्देश्य है। सूर्य जगत की आत्मा हैं। छठ का पावन पर्व इन्हीं जीवनदायी सूर्य देव को आभार प्रकट करने का महापर्व है, जिसमें हर कोई बिना किसी भेदभाव के सामूहिक रूप से उनकी आराधना करता है।
नवग्रहों के राजा हैं सूर्य
ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों में सूर्य को राजा का पद प्राप्त है। वेदों में भी अनेक स्थानों पर सूर्य देव की ऋचाएं प्राप्त हैं। पुराणों की बात करें तो सूर्य की उत्पत्ति, स्तुति, मंत्र आदि क वर्णन उसमें मिलता है। छठ पूजा में सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए सब्जियां, मिठाई, फल आदि unheइन अर्पित किया जाता है।
क्या है सूर्य उपासना की वैज्ञानिक मान्यता
वैज्ञानिक मान्यता है कि शरीर में विटामिन डी पूरा करने के लिए सूर्य आवश्यक है। सुबह और शाम के समय सूर्य के दर्शन करने से शरीर को सूर्य कि ऊर्जा प्राप्त होती है। यह बुद्धि को कुशाग्र और सबल बनाता है।