श्राद्ध पक्ष चल रहा
है और इन दिनों पितरों की आत्मा की शांति के लिए लोग श्राद्ध कर्म कर रहे हैं।
शास्त्रों का नियम है कि जिस तिथि को व्यक्ति मृत्यु हुई है पितृ पक्ष के दौरान आने
वाली उसी तिथि में मृत व्यक्ति का श्राद्ध करना चाहिए।
इस दिन श्राद्ध करने
से मृत व्यक्ति की आत्मा को उसके लिए किया गया श्राद्ध का अंश प्राप्त हो जाता है।
लेकिन जिस व्यक्ति की अकाल मृत्यु होती है उसकी आत्मा को आसानी से शांति नहीं मिलती
है। ऐसे व्यक्तियों के लिए श्राद्ध का विशेष दिन निर्धारित किया गया है।
शास्त्रों में कहा गया है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु दुर्घटना में, विष से
अथवा शस्त्र से हुई है उनका श्राद्ध चतुर्दशी के दिन करना चाहिए। इस वर्ष श्राद्ध
पक्ष की चतुर्दशी 14 तारीख को है। इस दिन अकाल मृत्यु प्राप्त पितरों का तर्पण और
श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती। शास्त्र यह भी कहता है कि अकाल मृत्यु
प्राप्त व्यक्तियों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन भगवत् कथा का पाठ भी करना
चाहिए। इससे अशांत आत्मा की मन की बेचैनी दूर होती है।
माना जाता है कि
जिनकी अकाल मृत्यु होती है उनकी आत्मा अपनी निर्धारित आयु तक भटकती रहती है। अपने
परिजनों से बिछड़ने का दुःख इन्हें हमेशा सताता है। बिहार के गया धाम एवं बद्रीनाथ
के पास ब्रह्मकपाली में श्राद्ध करने से अकाल मृत्यु प्राप्त व्यक्ति की आत्मा को
तत्काल उस जीवन से मुक्ति मिल जाती है और सद्गति प्राप्त होती है। मान्यता है कि
अकाल मृत्यु प्राप्त व्यक्ति की आत्मा की शांति नहीं होने पर वह परिवार के सदस्यों
को परेशान करता है।