कब है चतुर्दशी और चतुर्दशी श्राद्ध का समय
चतुर्दशी तिथि आरंभ: 12 अक्टूबर 2023, गुरुवार, सायं 07:53 बजे से हो रही है और यह तिथि शुक्रवार 13 चतुर्दशी तिथि समाप्त: 13 अक्टूबर 2023, शुक्रवार, रात्रि 09:50 तक
इसलिए चतुर्दशी यानी मासिक शिवरात्रि 13 अक्टूबर को मानी जाएगी। इस दिन इन मुहूर्तों में करना चाहिए चतुर्दशी श्राद्ध
कुतुप मूहूर्तः प्रातः 11:43 से दोपहर 12:30 तक
रौहिण मूहूर्तः दोपहर 12:30 से दोपहर 01:17 तक
अपराह्न कालः दोपहर 01:17 बजे से दोपहर 03:37 बजे तक
शिवरात्रि पर शुभ योग
ब्रह्म योग: प्रातः 10:06 बजे तक
इंद्र योगः पूरे दिन
चतुर्दशी पर करें इन लोगों का श्राद्ध
चतुर्दशी श्राद्ध तिथि केवल उन मृतकों के श्राद्ध के लिए उपयुक्त होती है,जिनकी मृत्यु असामान्य परिस्थिति में हुई हो या जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो। उदाहरण के लिए किसी व्यक्ति की मृत्यु हथियार से हुई हो,दुर्घटना में हुई हो,उसने आत्महत्या की हो या किसी अन्य द्वारा उसकी हत्या की गई हो। इन्हीं का श्राद्ध पितृ पक्ष की चतुर्दशी को होगा,इनके अतिरिक्त चतुर्दशी तिथि पर किसी अन्य का श्राद्ध नहीं किया जाता है।
जिन लोगों की मृत्यु चतुर्दशी तिथि को हुआ है उनका श्राद्ध अमावस्या तिथि पर किया जाता है। इसे के कारण चतुर्दशी श्राद्ध को घट चतुर्दशी श्राद्ध, घयल चतुर्दशी श्राद्ध और चौदस श्राद्ध के नाम से जाना जाता है।
चतुर्दशी तिथि में श्राद्ध का नियम
महाभारत और कूर्मपुराण के अनुसार चतुर्दशी तिथि पर स्वाभाविक रूप से मरने वालों का श्राद्ध करने से संतान को भविष्य में कई आर्थिक,मानसिक और शारीरिक परेशानियां हो सकती है। इस संबंध में महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया था। पितामह भीष्म ने युधिष्ठिर से कहा था कि जो लोग आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को तिथि जिन लोगों की स्वाभाविक मृत्यु न हुई हो सिर्फ उन्हीं का श्राद्ध करना चाहिए वर्ना संतान को कष्ट होता है।