भारत में जगह-जगह जहां विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर हैं, वही बिजनौर में भाई-बहन के प्यार का प्रतीक एक मंदिर स्थापित है। मंदिर में भाई-बहन की शिलाओं की पूजा होती है। रक्षाबंधन को मंदिर में विशेष पूजा होती है। यह मंदिर जिला मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत नांगल जट के निकट गांव चुड़िया खेड़ा में स्थित है।
भाई-बहन देवता का मंदिर क्षेत्र भर में आस्था का केंद्र है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस तरह का यह एक मात्र मंदिर है, जो भाई-बहन की स्मृति में बनाया गया है। कुछ लोगों का मानना है कि यह मंदिर सतयुग काल का है तो कुछ लोग इसे पाषाण काल का बताते हैं। इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि एक बार एक भाई अपनी नवविवाहिता बहन को विदा कराकर अपने घर ला रहा था।
अचानक भाई-बहन को डाकुओं ने घेर लिया। अकेला भाई बहन की लाज बचाने में असमर्थ था। इस विकट स्थिति में भाई बहन ने सच्चे मन से ईश्वर की प्रार्थना करनी शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि, हे ईश्वर यदि उनकी भक्ति में सत्य है तो ईश्वर बहन की लाज बचाए और उन्हें पत्थर का बना दे। भगवान ने उनकी विनती स्वीकार कर ली और दोनों देखते-देखते पत्थर के बना गए। और धरती में समा गए। कुछ भाग जमीन के ऊपर रह गया।
ग्रामीण इन्हें भाई-बहन की शिला मानकर पूजते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन शिलाओं का आकार बढ़ रहा है। मंदिर का निर्माण किसने करवाया, इसकी कोई जानकारी नहीं है। मंदिर के पुजारी हरिओम के अनुसार यह मंदिर भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है।
मंदिर में प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा होती है। भाई-बहन के प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन मंदिर में मनाया जाता है। रक्षाबंधन के अवसर पर हजारों लोग भाई-बहन देवता का आशीर्वाद लेने मंदिर आते हैं। सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस क्षेत्र में नवविवाहित जोड़े विवाह के अगले दिन मंदिर आकर दर्शन करते हैं।