Bhishma Ashtami 2022: महाभारत के युद्ध में जख्मी होने के बावजूद भीष्म पितामह 18 दिनों तक मृत्यु शैय्या पर लेटे थे। इसके बाद उन्होंने माघ शुक्ल अष्टमी तिथि को चुना और मोक्ष प्राप्त किया।
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भीष्म अष्टमी का महत्व
श्रीमद्भगवद्गीता में बताया गया है कि किस तरह अर्जुन के तीरों से घायल होकर महाभारत के युद्ध में जख्मी होने के बावजूद भीष्म पितामह 18 दिनों तक मृत्यु शैय्या पर लेटे थे। इसके बाद उन्होंने माघ शुक्ल अष्टमी तिथि को चुना और मोक्ष प्राप्त किया। उन्होंने अपने शरीर को त्यागने के लिए शुभ क्षण की प्रतीक्षा की। इस दिन लोग उनके लिए एकोदिष्ट (एकोदिष्ट) श्राद्ध करते हैं। उनका श्राद्ध उन लोगों के लिए निर्धारित किया गया है, जिन्होंने अपने पिता को खो दिया है।
Bhishma Ashtami 2022: युधिष्ठिर के मन से आत्मग्लानि दूर करने के लिए पितामाह भीष्म ने राजधर्म, मोक्षधर्म और आपद्धर्म की बहुमूल्य शिक्षा प्रदान की।
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भीष्म पितामाह ने दिए थे युधिष्ठिर को ये मूलमंत्र
अर्जुन के तीरों से घायल होकर जब पितामाह भीष्म बाणों की शैय्या पर लेटे थे। तब श्रीकृष्ण के आदेश पर वहां युधिष्ठिर पहुंचे। तब युधिष्ठिर के मन से आत्मग्लानि दूर करने के लिए पितामाह भीष्म ने राजधर्म, मोक्षधर्म और आपद्धर्म की बहुमूल्य शिक्षा प्रदान की। यह शिक्षा हमारे जीवन में भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वो शिक्षाएं-
- जीवन में आप कितनी भी ऊंचाइयों पर पहुंच जाएं, आपके मन में अहंकार की भावना नहीं आनी चाहिए। यदि आपको कभी ऐसा लगे तो अपने बीते दिन याद करने चाहिए।
- जीवन में कोई भी जरूरत मंद हो उसको आश्रय अवश्य दें। न ही किसी की निंदा करें और न ही दूसरों की सुनें।
- शास्त्रों को सदैव नियम पूर्वक सुने और पढ़े।
- स्वंय आदर की इच्छा न करके भी दूसरों का सम्मान अवश्य करें।
- ऐसा मनुष्य सदा सुखी रहता है, जो व्यर्थ की चिंता न करने वाला हो, जो सत्य का पालन करता है जिसे सांसारिक मोह न हो।
- जो व्यर्थ में ही अपने आप को दुखी करता है वह अपना सब कुछ नष्ट कर लेता है। इसलिए दुख को अपने भीतर प्रवेश न करने दें।
- जो दूसरों के सुख और धन को देखकर जलन की भावना नहीं रखते हैं, विद्वानों का आदर करते हैं,आलस्य नहीं करते हैं अपना सारा काम समय पर करते हैं, ऐसे मनुष्यों को सदैव सुख प्राप्त होता है।