Bhanu Saptami: पौष महीने के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि यदि अगर रविवार को आए तो ये दिन सूर्य पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व को भानु सप्तमी के रूप में जाना जाता है। 9 जनवरी को ऐसा ही योग बन रहा है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन पूजा करने से अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही इस दिन सर्वार्थसिद्धि और प्रवर्ध नाम के 2 शुभ योग भी बन रहे हैं।
पुराणों में सूर्य पूजा का उल्लेख
पौष माह भगवान सूर्य को समर्पित है। स्कंद पुराण और पद्म पुराण में इस बात का उल्लेख है कि पौष माह में सूर्य को जल चढ़ाने से पुण्य मिलता है और पाप से मुक्ति भी मिलती है। वेदों में भी सूर्य को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। इसलिए सूर्य उपासना से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। पौष माह में भानु सप्तमी के संयोग में भगवान सूर्य की पूजा के साथ ही दिनभर व्रत भी रखा जाता है। मान्यता के अनुसार यदि कोई भक्त भानु सप्तमी का व्रत रखना चाहते है तो उसे बिना नामक कहे व्रत रखना होगा। ऐसा करने से यश, धन और आयु में वृद्धि होती है। यदि कोई भानु सप्तमी का व्रत रखता है तो उसे उससे जुड़ी कुछ कार्य करने चाहिए। आइए जानते हैं क्या हैं वो कार्य।
भानु सप्तमी के दिन करें ये कार्य
- भानू सप्तमी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठना अनिवार्य है।
- ब्रह्ममुहूर्त में पानी में तिल मिलाकर स्नान करें।
- जातक को लाल वस्त्र धरण करके और लाल चंदन का टीका लगाकर तांबे के कलश में जल भरकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- भानु सप्तमी के दिन दान भी अनिवार्य है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को गुड़, तिल और गर्म कपड़े दान करें।
- सूर्य ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनकी प्रत्यक्ष रूप से अर्चना की जाती है और इसलिए पौष माह में सूर्य देव को जल चढ़ाने से पुण्य प्राप्त होता है।
- सफलता और तरक्की के लिए भी सूर्यदेव को जल चढ़ाया जाता है।
- वाल्मीकि रामायण के अनुसार युद्ध के लिए लंका जाने से पहले भगवान श्रीराम ने भी सूर्यदेव को अर्घ्य देकर उनकी आराधना की थी।