भगवान श्री राम की जन्म भूमि अयोध्या बाबरी मस्जिद ढ़ांचा के गिराए जाने के बाद से विवादों में है और अब एक नया विवाद 84 कोस की परिक्रमा के लेकर खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद ने 25 अगस्त से 84 कोस की परिक्रमा का प्रस्ताव रखा है। यात्रा की शुरुआत अयोध्या से होगी और बस्ती, अंबेडकरनगर, बाराबंकी, गोंडा होते हुए 13 सितम्बर को यह यात्रा अयोध्या में पूरी होगी।
संघ और राज्य सरकार इस यात्रा को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। यात्रा के लिए आने वाले साधु-संतों को पकड़कर उन्हें वापस भेजा जा रहा है। जबकि 84 कोसी यात्रा में साधु-संतों की अटूट आस्था है। संतों का मानना है कि जिस प्रकार गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से पुण्य की प्राप्ति है उसी 84 कोस की परिक्रमा करने से मुक्ति यानी मोक्ष की प्राप्ति होती है।
धार्मिक विषयों के जानकर पंडित जयगोविंद शास्त्री बताते हैं कि बनारस के पंच कोसी की परिक्रमा करने से शिव लोक में स्थान प्राप्त होता है। गोवर्धन के सप्त कोसी की परिक्रमा से गोलोक और अयोध्या के 84 कोसी की परिक्रमा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। अयोध्या की परिक्रमा 84 किलोमीटर की इसलिए है क्योंकि भगवान श्री राम कौशल देश के राजा थे जिसकी सीमा 84 कोस में फैली थी और अयोध्या इसकी राजधानी थी।
भगवान राम के जीवन काल में ही संतों ने 84 कोस की परिक्रमा की शुरुआत की थी। वैसे तो नियम है कि चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर बैसाख नवमी तक यह परिक्रमा चलती है। लेकिन श्रद्घालु भक्त कभी भी कौशल राज्य की पवित्र भूमि की परिक्रमा कर सकते हैं।