फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इसलिए केदारनाथ के दर्शनों के लिए फिर से लोगों में उत्साह बनेगा

विज्ञापन
विज्ञापन
शिवपुराण की कोटिरूद्र संहिता के अनुसार नर और नारायण दोनों ने पवित्र हिमालय के बद्रिकाश्रम तीर्थ में पार्थिव शिवलिंग निर्मित करके भगवान शिव की पूजार्चना आरम्भ की। वह रोज श्रद्धा-विश्वास के साथ यम-नियम संयम आदि का पालन करते हुए शिव भक्ति में मगन रहते।
विज्ञापन


हर समय उनकी आराधना करते। आखिर शिव उन की भक्ति से प्रसन्न होकर केदार चोटी पर केदारतीर्थ में ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थित हो गए। यह स्थल लोगों में अटला आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है।
Trending Videos

केदारनाथ की रौनक लौटाएगा चन्द्रमा

वर्तमान में प्लंवग नामक संवत्सर के राजा और मंत्री दोनों का अधिकार परम शिवभक्त चन्द्रमा के पास है। चंद्रमा मन बुद्धि एवं अहंकार के अधिपति तो हैं ही, शिवभक्तों पर इनकी विशेष कृपा भी रहती है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राजयक्ष्मा, क्षयरोग किसी भी तरह के चर्मरोग, मानसिक व्यग्रता पारिवारिक कलह, कफ, नज़ला, निमोनिया श्वास से सबंधित रोग से पीड़ित व्यक्ति जब शिव स्वरूप ज्योतिर्लिंग पर पंचामृत का लेप करता है तो उसकी जन्म कुंडली में चन्द्रजनित दोष शांत हो जाते हैं।
विज्ञापन

गुरू के इस इस योग का मिलेगा भक्तों को लाभ

इसी वर्ष देवगुरु बृहस्पति ने बारह वर्षों के बाद पुनः परमहंस योग बनाया है। इस योग का खास महत्व है। इस योग में किसी भी ज्योतिर्लिंग या तीर्थक्षेत्र में जाकर थोड़ा-सा भी जप-तप दानपुण्य किया जाए तो व्यक्ति को पूर्ण सुख मिलता है।
 
चन्द्र और गुरु द्वारा बनाया गया यह दुर्लभ योग वर्तमान संवत्सर के अंत 20 मार्च 2015 तक रहेगा। इस अवधि में यह हर दृष्टि से शुभ कल्याणकारी है।

दैवीय प्रकोप के पश्चात इस तरह के योग बनते हैं। क्योंकि जीवन में घटने वाली सभी घटनाओं की तिथियाँ पहले से ही तय की जा चुकीं हैं। योग बताते है कि पुनः श्रीकेदारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन हेतु भक्तों का उत्साह बरकररार रहने वाला है। लोग आगे पूरी श्रद्धा और विश्वास से केदारधाम में आएंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें