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अक्षय तृतीया पर खुलते हैं बद्रीनाथ के पवित्र पट,आस्था और पौराणिक मान्यताओं का अनोखा संगम

Tue, 29 Apr 2025 06:03 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

धर्मग्रंथों में अक्षय तृतीया का दिन विशेष महत्व रखता है। यह दिन न केवल एक दिव्य अवसर होता है, बल्कि इस दिन भगवान विष्णु के प्रतिष्ठित धाम, बद्रीनाथ के पवित्र पट भी खोले जाते हैं।
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Akshaya Tritiya 2025: बद्रीनाथ धाम के कपाट अक्षय तृतीया पर खुलते हैं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Akshaya Tritiya 2025: धर्मग्रंथों में अक्षय तृतीया का दिन विशेष महत्व रखता है। यह दिन न केवल एक दिव्य अवसर होता है, बल्कि इस दिन भगवान विष्णु के प्रतिष्ठित धाम, बद्रीनाथ के पवित्र पट भी खोले जाते हैं। यह पर्व धार्मिक आस्था का प्रतीक है, जो भारतीय सनातन परंपरा की गहरी जड़ों से जुड़ा हुआ है। हिमालय की तलहटी में बसे बद्रीनाथ धाम को''धरती का वैकुण्ठ'' कहा जाता है। बद्रिकाश्रम यानि ''बदरी सदृशं तीर्थम् न भूतो न भविष्यति ''अर्थात बद्रीनाथ जैसा स्थान मृत्युलोक में न पहले कभी था न भविष्य में होगा।
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भगवान विष्णु का तप स्थल
उत्तराखंड के हिमालय पर्वत की गोद में स्थित बद्रीनाथ धाम, भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक के रूप में श्रद्धेय है। यह तीर्थ स्थल पद्म पुराण और विष्णु पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में उल्लेखित है और इसे पवित्र चार धाम तीर्थों में सर्वोत्तम माना जाता है। बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु का विग्रह स्थायी रूप से स्थित है, जो वहां की तपस्थली और धार्मिक महिमा का प्रतीक है।माना जाता है कि भगवान विष्णु विग्रह रूप में यहाँ तपस्यारत हैं।

पौराणिक श्लोक से बद्रीनाथ की महिमा
पद्म पुराण में बद्रीनाथ धाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है:

"न बद्री समं तीर्थं, न नारायणात्परः।
न गङ्गा समं तीर्थं, न काशी समं नगरी॥"


अर्थात, बद्रीनाथ जैसा कोई तीर्थ नहीं है, और भगवान विष्णु के समान कोई देव नहीं। यह श्लोक इस बात को सिद्ध करता है कि बद्रीनाथ धाम सर्वश्रेष्ठ तीर्थ है, जहां दिव्य दर्शन से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस धाम के बारे में कहावत है कि-"जो जाए बद्री,वो न आए ओदरी"यानि जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है उसे माता के गर्भ में दोबारा नहीं आना पड़ता,प्राणी जन्म और मृत्यु के चक्र से छूट जाता है।
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अक्षय तृतीया और कपाट खुलने की परंपरा
हर वर्ष जब शीतकाल में बद्रीनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं, तो अक्षय तृतीया के दिन इन कपाटों को पुनः खोला जाता है। यह दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु ने तपस्या शुरू की थी।
आधिकारिक रूप से बद्रीनाथ धाम के कपाट खोलने की प्रक्रिया में स्थानीय राजपरिवार और पुजारियों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। पहले पंचामृत से स्नान कराकर भगवान विष्णु का विशेष श्रृंगार किया जाता है, फिर श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन का अवसर मिलता है। इस दौरान मंदिर के वातावरण में भव्य पूजा अर्चना होती है और 'जय बद्री विशाल' के उद्घोष से पूरा स्थान गूंज उठता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त इस दिन बद्रीनाथ धाम के दर्शन करता है, उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

हमेशा जलता है दीप
अक्षय तृतीया पर जब बद्रीनाथ के कपाट खुलते हैं उस समय भी मंदिर में एक दीपक जलता रहता है,इस दीपक के दर्शन का बड़ा महत्त्व है।मान्यता है कि 6 महीने तक बंद दरवाज़े के अंदर इस दीप को देवता जलाए रखते हैं।
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