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जब युधिष्ठिर को पता चला कि उन्होंने मृत्यु पर विजय पा ली

Mon, 24 Aug 2015 11:17 AM IST
जयरामदास दीन
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युधिष्ठिर को बड़ी हैरानी हुई। नगाड़े क्यों बजाए जा रहे हैं, यह जानने के लिए वह अपने विश्राम कक्ष से बाहर आए। कक्ष से बाहर निकलते ही उनका सामना भीम से हो गया। उन्होंने भीम से पूछा, ये विजय दुंदुभि क्यों बज रहे हैं?
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भीम ने नम्रता से उत्तर दिया, महाराज, हमारी सेना ने तो कोई विजय प्राप्त नहीं की है। पर पता चला है कि आपने काल पर विजय प्राप्त कर ली है। सुनकर युधिष्ठिर की हैरानी और बढ़ गई। उन्होंने फिर पूछा, मैंने काल पर विजय प्राप्त कर ली है! आखिर तुम कहना क्या चाहते हो?

भीम ने हाथ जोड़कर कहा, महाराज, अभी कुछ देर पहले आपने एक ब्राह्मण से कहा कि वह कल मिले। तब उसकी समस्या और हल आप सुनेंगे। इससे जाहिर है कि आज तो मृत्यु आपका कुछ बिगाड़ नहीं सकती। ब्राह्मण से आपका संवाद सुनने के बाद मैंने सोचा कि आपने काल पर विजय प्राप्त कर ही ली है, वरना आप उस ब्राह्मण को कल मिलने के लिए कतई नहीं कहते। यह सोचकर मैंने नगाड़े बजाने की आज्ञा दी थी।
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भीम की बात सुनकर महाराज युधिष्ठिर की आंखें खुल गईं। उन्हें अपनी भूल का पता लगा। तभी उन्हें पीछे खड़ा हुआ ब्राह्मण दिखाई दे गया। उन्होंने याचक से उसकी आवश्यकता के बारे में पूछा। ब्राह्मण ने बताया कि अगले शुक्लपक्ष में उसकी बेटी का विवाह है। खर्च के लिए कुछ भी पास में है नहीं। कोई संभावना भी दिखाई नहीं दे रही। ब्राह्मणी ने कहा कि धर्मराज के पास जाओ। वह अवश्य कोई प्रबंध कर देंगे।

ब्राह्मण की बात सुनकर धर्मराज ने ब्राह्मण की जरूरत के लिए यथेष्ट प्रबंध कर दिया। फिर भीम से वह बोले, क्षमा करना। मैं इस बात से चूक रहा था कि शुभ संकल्प को एक पल के लिए भी स्थगित नहीं करना चाहिए।
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