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क्या सच में प्यार करती है या टहला रही है, यूं जान लेंगे

Thu, 09 Jan 2014 03:12 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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अक्सर प्यार में धोखा खाने के बाद यह सोचते हैं कि काश उसके मन की बात जान जाते। असल में उसे मुझसे प्यार है भी या नहीं पहले जान जाते तो धोखा नहीं खाना पड़ता।
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असल में किसी के मन को पढ़ पाना आम इंसान की क्षमता से बाहर की चीज है। लेकिन ऐसा नहीं है कि आम इंसान इस क्षमता को विकसीत नहीं कर सकता। परामनोविज्ञान के अनुसार टेलीपैथी ऐसी विद्या है जिससे दूर बैठे व्यक्ति के मस्तिष्क से संपर्क बनाकर आपस में बात चीत और मन की बात जाना जा सकता है।

प्राचीन काल में ऋषि मुनि इसी शक्ति से भूत भविष्य और दूसरों के मन की बात जान लेते थे। लेकिन उन दिनों इसे दिव्य दृष्टि और त्रिकालदर्शी शक्ति के नाम से जाना जाता था। लेकिन अब इसे टेलीपैथी के नाम से जाना जाता है।
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माना जाता है कि टेलीपैथी शब्द का सबसे पहला इस्तेमाल 1882 में फैड्रिक डब्लू एच मायर्स ने किया था। टेलीपैथी के कई प्रकार होते हैं। इस क्षेत्र में बहुत से प्रयोग हो चुके हैं। कुछ लोग टैक्नोपैथी की बात भी करते हैं। उनका मानना है कि भविष्य में ऐसी तकनीक विकसित हो जाएगी जिससे टेलीपैथी संभव हो सकती है।

इंगलैंड के रैडिंग विश्वविद्यालय के कैविन वॉरिक का शोध इसी विषय पर है कि किस तरह एक व्यावहारिक और सुरक्षित उपकरण तैयार किया जाए जो मानव के स्नायु तंत्र को कंप्यूटरों से और एक दूसरे से जोड़े। उनका कहना है कि भविष्य में हमारे लिए संपर्क का यह प्रमुख तरीका बन सकता है।
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