फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जब आप जैसे ही किसी ने पूछा क्या परमात्मा के दर्शन हो सकते हैं?

Sat, 22 Feb 2014 12:19 PM IST
शिवकुमार गोयल
विज्ञापन
विज्ञापन
गणेशपुरी के विख्यात संत बाबा मुक्तानंद परमहंस सत्संग के लिए आए लोगों के साथ कुटिया में बैठे वेदांत और परमात्मा की चर्चा कर रहे थे। वहां उपस्थित एक जिज्ञासु ने पूछा, बाबा, क्या परमात्मा के दर्शन हो सकते हैं? बाबा ने कहा, तुम हर क्षण परमात्मा के दर्शन करते हो, लेकिन ज्ञानचक्षु न होने के कारण उन्हें पहचान नहीं पाते।
विज्ञापन


कुछ क्षण मौन रहकर उन्होंने फिर कहा, यह जगत परमात्मा का ही प्रतिबिंब है। वेदांत का कथन सर्वे खल्विदं ब्रह्म पूर्ण सत्य है। सर्व देश, सर्व तीर्थ, सर्व नाम परमात्मा के हैं। भूमंडल के सर्व स्थान प्रभु के क्षेत्र हैं। जगत के सभी रूपों में परमात्मा का रूप छिपा है। अनंत की महिमा अनंत, नाम अनंत, लीला अनंत, परमात्मा का कोई अंत नहीं है।

किसी भी शास्त्र का अध्ययन कर लो, पूरा नहीं होगा। कितने ही तीर्थों की यात्रा कर लो, फिर भी अनेक तीर्थ बच जाएंगे। कितनी दूर तक दृष्टि डालो, नजर असीमित ऊंचाई तक पहुंच ही नहीं सकती। ऐसी दिव्य व्यापकता, विशालता और दिव्य महिमा है भगवत तत्व की। यह क्षणभंगुर शरीर कहीं दिव्य दृष्टि के अभाव में परमात्मा को बाहर खोजते-खोजते प्राणहीन होकर दुर्लभ जीवन को निष्फल न कर डाले।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाबा ने परमात्मा को पहचानने का उपाय बताते हुए कहा, ध्यान के निरंतर अभ्यास, अंतर्मुखी बनने से मानव में परमात्मा के दर्शन स्वतः होने लगेंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें