वर्षों की मेहनत के बाद एक किसान ने एक सुंदर बगीचा लगाया। बगीचे के बीचोंबीच एक बड़ा-सा पेड़ था, जिसकी छांव में बैठकर सुकून का अनुभव होता था। एक दिन किसान का पड़ोसी आया। बगीचा देखते ही उसने कहा, वाह, बगीचा तो बहुत सुंदर है, पर तुमने बीच में यह मनहूस पेड़ क्यों लगा रखा है?
पढ़ें18 नंबर की इन 9 खूबियों को जानेंगे तो हर काम 18 तारीख को करेंगे
किसान ने पड़ोसी से स्पष्ट बताने के लिए कहा, तो वह बोला, अरे, इस प्रजाति के पेड़ तो मनहूस माने जाते हैं। इस पेड़ को जल्दी ही यहां से हटाओ। यह सुनकर किसान सोच में पड़ गया। उसे डर सताने लगा कि कहीं इस पेड़ की वजह से कुछ अशुभ न हो।
पढ़ें,अगस्त महीने का राशिफलः किसकी चमकेगी किस्मत, किसकी रहेगी फीकी
अगले ही दिन उसने वह पेड़ कटवा डाला। पेड़ बड़ा था। उसकी कटी लकड़ियां पूरे बगीचे में जहां-तहां इकट्ठा हो गईं। अगले दिन फिर वही पड़ोसी आया, और बोला, इतने सुंदर बगीचे में ये लकड़ियां क्यों जमा हैं। फिर कुछ सोचता हुआ बोला, अच्छा, इन्हें मेरे अहाते में रखवा दो। किसान ने पड़ोसी की बातों में आकर पेड़ तो कटवा दिया, पर अब उसे लगने लगा कि उसने बेशकीमती पेड़ गंवा दिया है।
दुखी मन से वह महान गुरु लाओ-त्जु के पास पहुंचा और उन्हें पूरी बात बताई। लाओ-त्जु मुस्कराते हुए बोले, तुम्हारे पड़ोसी ने सच ही तो कहा था। वह पेड़ वाकई में मनहूस था, तभी तो वह तुम्हारे जैसे मूर्ख के बगीचे में लगा था। यह सुनकर किसान का मन और भारी हो गया। उसे दुखी देखकर लाओ-त्जु बोले, उदास मत होओ। अच्छी बात यह है कि तुम अब पहले जैसे नहीं रहे। तुमने पेड़ तो गंवा दिया, पर उसके बदले में कीमती सबक सीख लिया है। जब तक तुम्हारी अपनी समझ किसी बात को न स्वीकार करे, तब तक दूसरे की सलाह पर कोई कदम मत उठाना।