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दो बातों को याद रखिए वैवाहिक जीवन में प्रेम बना रहेगा

Wed, 23 Jul 2014 07:37 AM IST
जानकीशरण शर्मा
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संत तुकाराम उन दिनों पैठण में रहते थे। कई लोग उनसे मिलने आते, ताकि अपने मन की उलझी ग्रंथियां सुलझा सकें और अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ सकें। एक दिन एक व्यक्ति पत्नी के साथ उनके पास पहुंचा। प्रारंभिक शिष्टाचार के बाद वह पत्नी के स्वभाव में रच-बस गई आलस तथा कंजूसी की बुराई करने लगा। सचमुच ये दोनों आदतें उसमें थीं भी।
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तुकाराम ने उस औरत को स्नेहपूर्वक अपने पास बुलाया। वह महिला संत का अभिवादन कर उनके सामने बैठ गई। संत ने एक हाथ की मुट्ठी बांधकर उसके सामने करते हुए पूछा, यदि यह ऐसे ही सदा रहा करे, तो क्या परिणाम होगा, बताओ तो जरा? महिला सिटपिटाई जरूर, पर हिम्मत समेट कर बोली, यदि यह मुट्ठी सदा ऐसे ही बंधी रही, तो हाथ अकड़कर बेकार हो जाएगा।

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तुकाराम यह जवाब सुनकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने उस हाथ की मुट्ठी को खोल दिया और दूसरे हाथ की हथेली बिल्कुल खुली रखकर फिर पूछा, यदि यह हाथ ऐसे ही खुला रहे, तो फिर इस हाथ का क्या हश्र होगा, जरा यह भी बताओ। महिला ने फिर सकुचाते हुए कहा, ऐसी हालत में यह हाथ भी अकड़ कर बेकार हो जाएगा। तुकाराम ने उस महिला की भरपूर प्रशंसा की और कहा, यह तो बुद्धिमान भी है और दूरदर्शी भी। मुट्ठी बंधी रहने और हाथ सीधा रहने के नुकसान को यह अच्छी तरह जानती है।
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पति-पत्नी नमस्कार करके चले गए। वह महिला रास्ते भर संत तुकाराम के प्रश्नों पर गौर करती रही। अंत में उसे उसका मर्म समझ में आ ही गया। घर पहुंचकर उसने न सिर्फ पति की सहायता करके अधिक कमाना शुरू कर दिया, बल्कि बचत को खुले हाथ से दान करना भी आरंभ कर दिया।
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