गड़रिया मार्ग में प्रार्थना कर रहा था, हे ईश्वर, तू कहां है? मैं तेरी मदद करना चाहता हूं। मैं तेरे जूते झाड़ना और तेरे बालों में कंघी करना चाहता हूं। मैं तेरे कपड़े धोना चाहता हूं। जब तू सोने को जाए, तो मैं तेरे लिए दूध लाना चाहता हूं। मैं तेरा कमरा बुहारकर साफ करना चाहता हूं। ईश्वर, मेरी भेड़ और बकरियां सब तेरी हैं।
मूसा ने गड़रिये की बातें सुनी तो हैरान हुए कि भला यह भी कोई प्रार्थना है! उन्होंने गड़रिये से पूछा, तुम किससे बातें कर रहे हो? ईश्वर को तुम्हारे दूध की जरूरत नहीं है। और वह जूते लेकर क्या करेगा?
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गड़रिया बहुत दुखी हो गया। अपने आपको प्रताड़ित करते हुए उसने अपने कपड़े तार-तार कर दिए और रेगिस्तान में भटकता रहा। तब ईश्वर मूसा के सामने प्रकट हुए और बोले, तुमने मेरे प्रियवर को मुझसे दूर क्यों कर दिया?
मूसा ने कहा कि उसके शब्दों से आपकी शान में गुस्ताखी हो रही था। इस पर ईश्वर ने कहा, पैगंबर, तुम उन्हें मुझसे जोड़ने के लिए आए हो या जुदा करने के लिए? जिसे तुम गलत समझते हो, वह किसी और के लिए सही है। जो किसी के लिए विष है, वह दूसरे के लिए मधु के समान है।
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भक्ति भाव में पावन या अपावन, समर्पण या आलस्य का मेरे लिए कोई मोल नहीं है। किसी की भी आराधना या साधना का महत्व किसी अन्य व्यक्ति की आराधना या साधना से न तो कम है, न अधिक। जब कोई मेरी पूजा करता है, तो वह मुझे नहीं, बल्कि स्वयं का ही पूजन करता है।
मैं उसके मंत्रोच्चार या भजन के शब्दों को नहीं, वरन उसकी साधुता को देखता हूं। जिसे तुम अनुचित प्रार्थना कहते हो, वह सैकड़ों उत्तम प्रार्थनाओं से श्रेष्ठ है। जब कोई मुझे धन्यवाद दे और मेरी प्रशंसा में कुछ कहे, तो गड़रिये जैसी सादगी से कहे।