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Vat Savitri Vrat 2022: आज राहुकाल समेत इन 5 मुहूर्त में भूलकर भी ना करें वट सावित्री व्रत की पूजा

Mon, 30 May 2022 09:12 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

30 मई, सोमवार को वट सावित्री व्रत पर बहुत ही शुभ संयोग बना हुआ है जिसमें कई सालों बाद सोमवती अमावस्या का शुभ संयोग बन रहा है। सोमवती अमावस्या के दिन किया गया व्रत,पूजा-पाठ,स्नान व दान आदि का अक्षय फल मिलता है।
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Happy Vat Savitri Vrat 2022 Wishes: हिंदू पंचांग के अनुसार वट सावित्री व्रत प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर रखा जाता है। - फोटो : iStock
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विस्तार
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Vat Savitri Vrat Rahukal Timing 2022: आज अखंड सौभाग्यवती की कामना के लिए सुहागिन महिलाएं वट सावित्री का व्रत रख रही हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार वट सावित्री व्रत प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर रखा जाता है। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व होता है, जिसमें सुहागिन महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छी सेहत के लिए दिन भर उपवास रखते हुए वट वृक्ष की पूजा आराधना करती है। आज यानि 30 मई, सोमवार को वट सावित्री व्रत पर बहुत ही शुभ संयोग बना हुआ है जिसमें कई सालों बाद सोमवती अमावस्या का शुभ संयोग बन रहा है। सोमवती अमावस्या के दिन किया गया व्रत,पूजा-पाठ,स्नान व दान आदि का अक्षय फल मिलता है। इस दिन बरगद के वृक्ष की पूजा कर महिलाएं देवी सावित्री के त्याग,पतिप्रेम एवं पतिव्रत धर्म का स्मरण करती हैं एवं अपने पति के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती हैं। आइए जानते हैं आज वट सावित्री व्रत पूजा शुभ मुहूर्त,महत्व और पूजा विधि...
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वट सावित्री व्रत 2022 शुभ मुहूर्त
अमावस्या तिथि प्रारम्भ - मई 29, 2022 को 02:54 PM
अमावस्या तिथि समाप्त - मई 30, 2022 को 04:59 PM

वट सावित्री व्रत का महत्व
सुहागिन महिलाओं के लिए ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर आने वाला वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार पतिव्रता मां सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा के लिए यमराज से छुड़ाकर वापस ले आई थीं। इस दिन विशेष रूप से बदगद के वृक्ष की पूजा की जाती है। मान्यता है कि वट वृक्ष की पूजा करने से लंबी आयु,सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का फल प्राप्त होता है। यह वट सावित्री व्रत सुहागिन स्त्रियों के लिए सौभाग्यवर्धक,पापहारक,दुःखप्रणाशक और धन-धान्य प्रदान करने वाला होता है। 

वट सावित्री व्रत पूजाविधि
वट सावित्री व्रत में विशेष रूप से बरगद के पेड़ का महत्व होता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं स्नान के बाद सुंदर आभूषण और वस्त्र पहन कर बरगद वृक्ष के नीचे सावित्री और सत्यवान की मूर्ति रखकर विधि-विधान से पूजा करें। कच्चे दूध और जल से वृक्ष की जड़ों को सींचकर वृक्ष के तने में सात बार कच्चा सूत या मोली लपेटकर यथाशक्ति परिक्रमा करें। लाल वस्त्र,सिन्दूर,पुष्प,अक्षत,रोली,मोली,भीगे चने,फल और मिठाई सावित्री-सत्यवान के प्रतिमा के सामने अर्पित करें।साथ ही इस दिन यमराज का भी पूजन किया जाता है। पूजा के उपरान्त भक्तिपूर्वक हाथ में भीगे हुए चने लेकर सत्यवान-सावित्री की कथा का श्रवण और वाचन करना चाहिए। 
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आज इस मुहूर्त में ना करें वट सावित्री व्रत की पूजा- आराधना
ज्योतिष में किसी भी शुभ कार्य,पूजा, आराधना और अनुष्ठान में शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में किया का गया कार्य हमेशा सफल होता है। लेकिन कुछ दिन के अशुभ मुहूर्त भी होते हैं जिसमें पूजा-पाठ या शुभ कार्य का शुभारंभ वर्जित माना जाता है। ऐसे में आज वट सावित्री व्रत में पूजा-उपासना करते समय कुछ मुहूर्त का ध्यान में रखकर ही पूजा पाठ करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि राहुकाल,यमगण्ड,आडल योग,दुर्महूर्त और गुलिक काल को शुभ योगों में नहीं गिना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, आराधना और शुभ कार्यों को करना वर्जित माना गया है।
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राहुकाल- 07:08 ए एम से 08:51 ए एम
यमगण्ड- 10:35 ए एम से 12:19 पी एम
आडल योग- 05:24 ए एम से 07:12 ए एम
दुर्मुहूर्त- 12:46 पी एम से 01:42 पी एम
गुलिक काल- 02:02 पी एम से 03:46 पी एम
वर्ज्य- 01:05 ए एम, मई 31 से 02:52 ए एम,
 
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