वैशाख माह के व्रत त्योहार
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वैशाख माह का धार्मिक महत्व
भारतीय परंपरा में समय को केवल तिथियों और महीनों में नहीं बांटा गया, बल्कि हर महीने को एक आध्यात्मिक अवसर माना गया है। इन्हीं महीनों में वैशाख का स्थान सबसे ऊंचा बताया गया है। वैशाख माह में भगवान विष्णु की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। साथ ही यह भी माना जाता है कि भगवान बुद्ध और भगवान परशुराम का जन्म भी वैशाख मास में ही हुआ था। यही कारण है कि यह मास धर्म, करुणा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। जिस प्रकार सतयुग को युगों का सबसे पवित्र काल माना गया है, वेदों को समस्त ज्ञान का मूल कहा गया है, और गंगा को समस्त नदियों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है, उसी तरह वैशाख को महीनों में सबसे पुण्यदायक माना गया है। इस मास में किया गया प्रत्येक पुण्यकर्म, चाहे वह एक लोटा जल अर्पण हो, एक मुट्ठी अन्न का दान हो, या एक मन से बोला गया 'हरि' नाम सब हजार गुना फल देने वाला कहा गया है। ऐसा विश्वास है कि वैशाख में सूर्योदय के समय गंगाजल से स्नान करने, तुलसी में दीपक जलाने, और गरीब को भोजन कराने से जन्मों के पाप भी नष्ट हो सकते हैं।
वैशाख माह के व्रत त्योहार
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वैशाख माह के व्रत-त्योहार
14 अप्रैल मेष संक्रांति
16 अप्रैल संकष्टी गणेश चतुर्थी
18 अप्रैल गुड फ़्राइडे
20 अप्रैल ईस्टर
21 अप्रैल कालाष्टमी
24 अप्रैल वरुथिनी एकादशी
25 अप्रैल प्रदोष व्रत
26 अप्रैल मास शिवरात्रि
27 अप्रैल वैशाख अमावस्या अमावस्या
29 अप्रैल परशुराम जयंती
30 अप्रैल रोहिणी व्रत , अक्षय तृतीया
01 मई वरद चतुर्थी
03 मई गंगा सप्तमी
05 मई बगलामुखी जयंती , दुर्गाष्टमी व्रत
06 मई सीता नवमी
08 मई मोहिनी एकादशी
09 मई प्रदोष व्रत , परशुराम द्वादशी
11 मई नृसिंह जयंती
12 मई चैत्र पूर्णिमा , बुद्ध पूर्णिमा
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