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Vinayak Chaturthi 2024: वैशाख माह की विनायक चतुर्थी आज, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Sat, 11 May 2024 10:57 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Vinayaka Chaturthi 2024: हिंदू धर्म में गणेश जी को सर्वप्रथम पूजनीय माना जाता है। किसी भी नए कार्य की शुरुआत प्रभु के आशीर्वाद से ही होती है।
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Vaisakh Vinayak Chaturthi 2024 - फोटो : istock
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विस्तार
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Vinayaka Chaturthi 2024: हिंदू धर्म में गणेश जी को सर्वप्रथम पूजनीय माना जाता है। किसी भी नए कार्य की शुरुआत प्रभु के आशीर्वाद से ही होती है। सप्ताह के बुधवार के दिन गणेश जी की पूजा करना शुभ होता है। हालांकि, विशेष कृपा प्राप्ति के लिए विनायक चतुर्थी और भी शुभ है। इस तिथि पर प्रभु की विधि अनुसार पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। बता दें भगवान श्री गणेश भक्तों की सभी समस्याओं का निवारण करते हैं इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है।

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वैशाख माह का विनायक चतुर्थी व्रत शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाएगा। इस दिन उपवास करने से दुखों का निवारण होता है। साथ ही मनोकामनाएं भी पूरी होती है। इस बार विनायक चतुर्थी 11 मई 2024 को मनाई जाएगी। इस दौरान गणेश जी की पूजा शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए। इससे जीवन में तरक्की के योग बनते हैं। ऐसे में आइए पूजा विधि से लेकर शुभ मुहूर्त के बारे में जान लेते हैं।  

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विनायक चतुर्थी 2024 शुभ मुहूर्त
वैशाख माह में विनायक चतुर्थी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 10.57 से दोपहर 01.39 तक रहेगा। इस मुहूर्त में गणेश जी की विधि अनुसार पूजा कर सकते हैं।

पूजा विधि
  • विनायक चतुर्थी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठे।
  • इस दिन स्नान कर के घर में चौकी लगाकर लाल या पीले रंग का साफ वस्त्र उसपर बिछाएं।
  • अब गणेश भगवान को धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • इस दौरान उन्हें दूर्वा और पीले फूल भी अर्पित करें।
  • बाद में गणेश जी के साथ-साथ सभी देवी-देवताओं की आरती उतारें।
  • इस दौरान गणेश जी के मंत्रों का जाप करें।

गणेशजी के प्रभावशाली मंत्र
1- वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

2 - ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥

3-ऊँ गं गणपतये नमो नमः

4-ॐ गं गणपतये नमः

5- “ॐ वक्रतुंडाय हुम्”

शुभ लाभ गणेश मंत्र
ॐ श्रीं गं सौभाग्य गणपतये वर्वर्द सर्वजन्म में वषमान्य नम:।।

मंगल विधान हेतु गणेश मंत्र

गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः ।

द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः ॥

विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः ।

द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत् ॥

विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत् क्वचित् ।

रोजगार प्राप्ति हेतु मंत्र
ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है
 
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