Shardiya Navratri 2024
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जौ बोने का रहस्य
यव यानी जौ के अंकुरों का नाम जवारा है। ‘पयसो रूपं यद्यवाः’ इस श्रुति के अनुसार जौ पय का रूप है। पय दुग्ध को कहते हैं और जल को भी, अर्थात जो पीने से वृद्धि अथवा पुष्टि करे। हम देखते हैं कि जल पीने से औषधि, वनस्पतियों की और दूध पीने से प्राणियों की वृद्धि होती है। दुधारू पशुओं को जौ खिलाने से उनका दूध बढ़ता है। भोज्य पदार्थों, खासकर हविष्यान्नों में यव को प्रधानता दी गई है। कहा भी गया है- ‘यवोसि धन्य राजोसि- अर्थात तू यव है, तू धान्यों का राजा है।’ जौ वर्धनशील अनाज है। इस कारण महालक्ष्मी रूप शक्ति की पूजा में जवारे बोना उचित ही है।
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घट-स्थापन क्यों?
घट जल का आधार माना जाता है और जल वरुण देवता का प्रतीक है। वरुण देवता को वेदों में पाश-बंधन से छुड़ाने वाला बताया गया है। इसलिए प्रत्येक मांगलिक कर्मों में रुकावट डालने वाले बंधनों की निवृत्ति के लिए वरुण का पूजन किया जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।