Navratri Durga SaptaShati Path Niyam: 15 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि आरम्भ होने जा रही है। नवरात्रि आरंभ होते ही पूरे देश में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है। भक्त घर और मंदिरों में देवी की उपासना करते हैं। उपासना करते समय माता के भक्त हवन,चालीसा पाठ और दुर्गासप्तशती का पाठ करते हैं। मान्यता है कि माता के जो भक्त नवरात्रि के पूरे नौ दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करता है उसे सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है, सभी तरह के अनिष्ट का नाश हो जाता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय बहुत सी बातों का ध्यान देने की आवश्यकता है। आइए जानते हैं दुर्गा सप्तशती का पाठ करने की सही विधि और नियम क्या हैं। दुर्गा सप्तशती का पाठ हमेशा नियमों के अंतर्गत ही करना चाहिए अन्यथा बहुत परेशानी हो सकती है।
दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम
- धार्मिक मान्यता के अनुसार हाथ में सप्तशती की पुस्तक लेकर पाठ करने से अधूरे फल की प्राप्ति होती है। इसिलए जब भी आप दुर्गा सप्तशती का पाठ करें तो पुस्तक को किसी चौकी पर लाल रंग का साफ़ वस्त्र बिछाकर ऊपर रखें।
- दुर्गा सप्तशती पाठ को कहीं भी न रोकें। यदि आप सम्पूर्ण पाठ करते हैं तो चतुर्थ अध्याय पूरा होने के बाद विराम ले सकते हैं। जब भी आप दुर्गा सप्तशती का पाठ करें तो पाठ बीच में छोड़कर न उठें।
- दुर्गा सप्तशती के पाठ की गति न ही बहुत तेज हो और न ही बहुत धीमी। शब्दों का उच्चारण स्पष्ट और लय में होना चाहिए।
- दुर्गा सप्तशती का पाठ आरंभ करने से पहले ध्यान रखें बैठने वाला आसन या तो लाल रंग का हो या कुश का।
- दुर्गा सप्तशती का पाठ आरंभ करने से पहले पुस्तक हाथ जोड़कर प्रणाम करें और फिर माता रानी का ध्यान करें और उसके बाद पाठ करना आरंभ करें।
Shardiya Navratri 2023: नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए इस बार 45 मिनट का ही मुहूर्त, जानें सही समय
पढ़ते समय इसका भी रखें ध्यान
- यदि आप एक दिन में दुर्गा सप्तशती का पाठ नहीं कर पा रहे हैं तो कोई बात नहीं। ऐसे में पहले दिन आप सिर्फ मध्यम चरित्र का पाठ करें और इसके अगले दिन बचे हुए 2 चरित्र का पाठ करें।
- दुर्गा सप्तशती पाठ के लिए एक अन्य विकल्प भी है। इस दूसरा विकल्प ये है कि एक,दो, एक चार, दो एक और दो अध्यायों को क्रम से 7 दिन में पूरा करें।
- दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करने से पहले और बाद में ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाये विच्चे का पाठ जरुर करना चाहिए। पाठ करने के बाद मां दुर्गा से क्षमा जरुर मांगें।
- अगर श्रीदुर्गा सप्तशती का पाठ संस्कृत में नहीं कर पा रहे हैं तो हिन्दी में ही सरलता से इसका पाठ करें।
Shardiya Navratri 2023: नवरात्रि के पहले दिन होती है मां शैलपुत्री की पूजा, जानें पूजा विधि, मंत्र और भोग