आश्विन माह की कृष्ण अमावस्या को सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या कहते हैं। यह दिन पितृपक्ष का आखिरी दिन होता है। इस दिन किया गया श्राद्ध पितृदोषों से मुक्ति दिलाता है। साथ ही अगर कोई श्राद्ध तिथि में किसी कारण से श्राद्ध न कर पाया हो या फिर श्राद्ध की तिथि मालूम न हो तो सर्वपितृ श्राद्ध अमावस्या पर श्राद्ध किया जा सकता है।
इस बार यह 28 सितंबर शनिवार को है। ग्रह-नक्षत्रों के विशेष संयोग से इस वर्ष यह दिन काफी शुभ रहने वाला है। इस दिन शनिवार भी है और यह संयोग 20 साल बाद बन रहा है।
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इस दिन सात्विक और विद्वान ब्राह्मण को घर पर बुलाए और उन्हें भोजन कराएं। भोजन स्नान करके शुद्ध मन से बना हो और सात्विक हो।
सर्वपितृ अमावस्या के दिन प्रात: स्नान करने के बाद सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए और गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके बाद घर में श्राद्धभोज से गाय, कुत्ते, कौए, देव एवं चीटिंयों के लिए भोजन का अंश निकालकर उन्हें देना चाहिए। पितरों से श्रद्धापूर्वक मंगल की कामना करनी चाहिए।
सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितरों की शांति के लिए और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए गीता के सातवें अध्याय का पाठ करने का विधान भी है।
सर्वपितृ अमावस्या पर पीपल की सेवा और पूजा करने से पितृ होते है प्रसन्न। स्टील के लोटे में, दूध, पानी, काले तिल, शहद और जौ मिला लें और पीपल की जड़ में अर्पित कर दें।
ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः मंत्र का जाप भी लगातार करते रहना चाहिए।