फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भद्राकाल में क्यों नहीं बांधी जाती भाई की कलाई पर राखी, जानिए कौन है भद्रा और क्या होता है भद्राकाल ?

Fri, 25 Aug 2023 12:01 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Raksha Bandhan 2023 Date: इस वर्ष रक्षाबंधन के त्योहार पर भद्रा का साया रहने के कारण राखी 30 और 31 अगस्त दो दिन मनाई जाएगी। रक्षाबंधन पर्व को भाई-बहन के प्रेम और सदभाव के पर्व के रूप में मनाया जाता है।
विज्ञापन
Raksha Bandhan 2023: दैनिक पंचांग में भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने भद्रा को पंचांग में विशेष स्थान प्रदान किया है। - फोटो : iStock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Raksha Bandhan 2023 Date: रक्षाबंधन का त्योहार हर साल श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस वर्ष रक्षाबंधन के त्योहार पर भद्रा का साया रहने के कारण राखी 30 और 31 अगस्त दो दिन मनाई जाएगी। रक्षाबंधन पर्व को भाई-बहन के प्रेम और सदभाव के पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है इसके बदले में भाई बहन को भेंट देता है एवं सदैव उसकी रक्षा करने का वचन भी देता है।अच्छे मुहूर्त अथवा भद्रारहित काल में भाई की कलाई में राखी बांधने से भाई को कार्य सिद्धि और विजय प्राप्त होती है। आइए जानते हैं कौन है भद्रा और इसकी गणना कैसी की जाती है।

विज्ञापन


कौन है भद्रा?
पौराणिक कथा के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य नारायण और पत्नी छाया की कन्या व भगवान शनि की बहन है। मान्यता के अनुसार दैत्यों को मारने के लिए भद्रा गर्दभ के मुख और लंबी पूंछ और 3 पैरयुक्त उत्पन्न हुई। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भद्रा का स्वभाव भी शनि की तरह है। दैनिक पंचांग में भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने भद्रा को पंचांग में विशेष स्थान प्रदान किया है।  

जन्म लेते ही पहुंचाने लगी विघ्न
जन्म लेते ही भद्रा यज्ञों में विघ्न-बाधा पहुंचाने लगी और मंगल कार्यों में उपद्रव करने लगी तथा सारे जगत को पीड़ा पहुंचाने लगी। उसके स्वभाव को देखकर सूर्यदेव को उसके विवाह की चिंता होने लगी और वे सोचने लगे कि इसका विवाह कैसे होगा? सभी ने सूर्यदेव के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा दिया। सूर्यदेव ने ब्रह्माजी से उचित परामर्श मांगा। ब्रह्माजी ने तब विष्टि से कहा कि- 'भद्रे! बव, बालव, कौलव आदि करणों के अंत में तुम निवास करो तथा जो व्यक्ति तुम्हारे समय में गृह प्रवेश तथा अन्य मांगलिक कार्य करे, तो तुम उन्हीं में विघ्न डालो। जो तुम्हारा आदर न करे, उनका कार्य तुम बिगाड़ देना।' इस प्रकार उपदेश देकर ब्रह्माजी अपने लोक चले गए। तब से भद्रा अपने समय में ही देव-दानव-मानव समस्त प्राणियों को कष्ट देती हुई घूमने लगी।
विज्ञापन


Raksha Bandhan 2023 Date: कब है रक्षाबंधन 30 या 31 अगस्त को? क्यों है भ्रम की स्थिति, जानिए 10 कारण
विज्ञापन


क्या होता है भद्राकाल ?
मुहुर्त्त चिन्तामणि शास्त्र के अनुसार जब भद्राकाल प्रारंभ होता है तो इसमें शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। यहां तक कि यात्रा भी नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही भद्राकाल में राखी बांधना भी शुभ नहीं माना गया है। मान्यता के अनुसार चंद्रमा की राशि से भद्रा का वास तय किया जाता है। गणना के अनुसार चंद्रमा जब कर्क राशि, सिंह राशि, कुंभ राशि या मीन राशि में होता है। तब भद्रा का वास पृथ्वी में निवास करके मनुष्यों को क्षति पहुंचाती है। वहीं मेष राशि, वृष राशि, मिथुन राशि और वृश्चिक राशि में जब चंद्रमा रहता है तब भद्रा स्वर्गलोक में रहती है एवं देवताओं के कार्यों में विघ्न डालती है। जब चंद्रमा कन्या राशि, तुला राशि, धनु राशि या मकर राशि में होता है तो भद्रा का वास पाताल लोक में माना गया है। भद्रा जिस लोक में रहती है वहीं प्रभावी रहती है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें