पुत्रदा एकादशी का महत्व
संतान सुख का आशीर्वाद: यह व्रत उन दंपत्तियों के लिए विशेष रूप से फलदायी है जो संतान सुख की इच्छा रखते हैं।
फल की प्राप्ति व पुण्यों का नाश: शास्त्रों के अनुसार इस व्रत से वर्तमान और पूर्व जन्म के पाप समाप्त होते हैं। इस व्रत को करने से अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिलता है एवं भगवान विष्णु अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
मोक्ष की प्राप्ति: पुत्रदा एकादशी व्रत धर्म, पुण्य, और मोक्ष प्रदान करता है।
सुख-शांति और समृद्धि: यह व्रत परिवार में सुख-शांति और समृद्धि लाने वाला माना गया है।
आध्यात्मिक उन्नति: भगवान विष्णु की पूजा और उनके नाम का स्मरण आत्मा को शुद्ध करता है।
परिवार का कल्याण: व्रत न केवल संतान प्राप्ति के लिए, बल्कि संपूर्ण परिवार के कल्याण के लिए शुभ माना गया है।
पुत्रदा एकादशी पूजा विधि
पुत्रदा एकादशी के दिन प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान पर भगवान विष्णु अथवा श्रीकृष्ण के बालरूप की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। संतान कामना के लिए इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। योग्य संतान के इच्छुक दंपत्ति प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्र पहनकर भगवान् को पीले वस्त्र पहनाएं और तुलसी, पीले पुष्प, फल, और दीपक अर्पित करें।इसके बाद संतान गोपाल मंत्र का जाप करना चाहिए। रात्रि में जागरण करते हुए भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करें। अगले दिन द्वादशी पर व्रत का पारण करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
Paush Putrada Ekadashi 2025: संतान प्राप्ति के लिए पुत्रदा एकादशी के दिन करें ये उपाय, जल्द बनेंगे योग
व्रत का कथानक
पूर्वकाल की बात है,भद्रावतीपुरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे। उनकी रानी का नाम चंपा था। विवाह के काफी समय बाद भी राजा-रानी संतान सुख से वंचित थे।इसलिए दोनों पति-पत्नी सदा चिंता और शोक में डूबे रहते थे।एक दिन दुखी होकर राजा घोड़े पर सवार होकर गहन वन में चले गए। पुरोहित आदि किसी को इस बात का पता न था।मृग और पक्षियों से सेवित उस सघन वन में राजा भ्रमण करने लगे। वन में राजा को एक सुन्दर सरोवर के पास कुछ वेद पाठ करते हुए मुनि दिखाई पड़े । राजा मुनियों के पास पहुंचे और उन्हें प्रणाम किया । मुनियों ने बताया कि हम विश्वदेव हैं,यहां स्नान के लिए आए हैं। राजा ने उनसे अपनी संतानहीनता का दुःख बताया और इसका उपचार भी पूछा। मुनियों ने राजा से कहा कि आपने बड़े ही शुभ दिन यह प्रश्न किया है,आज पौष शुक्ल एकादशी तिथि है । इसके बाद मुनियों के द्वारा बताई गई विधि से राजा ने पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा । इस व्रत के पुण्य से रानी ने कुछ समय बाद एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया । बड़ा होकर राजा का यह पुत्र धर्मात्मा और प्रजापालक हुआ।