पितृ पक्ष में घर पर श्राद्ध करने की विधि
श्राद्ध तिथि के अनुसार आप पितरों का श्राद्ध करें। यदि आपको तिथि याद नहीं है, तो आप सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। इस दिन सबसे पहले स्नान कर लें। फिर साफ वस्त्रों को पहनें। इस दौरान घर की साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए। पितृपक्ष में सूर्यदेव के रूप में ही पितरों को पूजा जाता है। इसलिए आप सूर्यदेव को अर्ध्य दें। इसके बाद घर की दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं।
इसके बाद आप अपने पितरों की पसंद के अनुसार भोजन तैयार करें। फिर भोजन का पहला भोग पांच तरह के जीव यानी कौवा, गाय, कुत्ता, चींटियों और देवताओं को लगाएं।
अब पितरों की तस्वीर के सामने धूप लगाएं, और उनकी पूजा शुरू करें। इस दौरान सफेद वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए, जैसे, सफेद फूल, उड़द, गाय का दूध, घी, खीर, चावल, मूंग आदि। अब पितरों को भोजन का भोग लगाएं, और ग्रहण करने की प्रार्थना करें। इसके बाद आप ब्राह्मणों को भोजन कराएं, और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा दें।
श्राद्ध की सभी मुख्य तिथियां
17 सितंबर मंगलवार पूर्णिमा का श्राद्ध (ऋषियों के नाम से तर्पण)
18 सितंबर बुधवार प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध (पितृपक्ष आरंभ)
19 सितंबर गुरुवार द्वितीया तिथि का श्राद्ध
20 सितंबर शुक्रवार तृतीया तिथि का श्राद्ध
21 सितंबर शनिवार चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
22 सितंबर शनिवार पंचमी तिथि का श्राद्ध
23 सितंबर सोमवार षष्ठी और सप्तमी तिथि का श्राद्ध
24 सितंबर मंगलवार अष्टमी तिथि का श्राद्ध
25 सितंबर बुधवार नवमी तिथि का श्राद्ध
26 सितंबर गुरुवार दशमी तिथि का श्राद्ध
27 सितंबर शुक्रवार एकादशी तिथि का श्राद्ध
29 सितंबर रविवार द्वादशी तिथि का श्राद्ध
30 सितंबर सोमवार त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध
1 अक्टूबर मंगलवार चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध
2 अक्टूबर बुधवार सर्व पितृ अमावस्या (समापन)
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।