यह है महाशिवरात्रि के पूजन की सही विधि
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Mahashivratri shubh Muhurat: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना का एक प्रमुख पर्व है, जो फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण उपवास रखते हैं, शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, और रात्रि जागरण के माध्यम से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। हालांकि, इस बात को लेकर महिलाएं काफी संशय में हैं कि महाशिवरात्रि किस दिन मनाई जाएगी। बता दें कि आपको बिल्कुल भी भ्रमित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि इस बार महाशिवरात्रि का त्योहार 26 फरवरी को ही मनाया जाएगा। ऐसे में हम आपको बताते हैं कि इस बार किस विधि से महादेव की पूजा-अर्चना करनी चाहिए, जिससे वह प्रसन्न हो जाएं। आइए जानते हैं।
महाशिवरात्रि के दिन के प्रमुख अनुष्ठान
- उपवास: भक्तगण दिनभर उपवास रखते हैं, जिससे शरीर और मन की शुद्धि होती है।
- शिवलिंग अभिषेक: शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, दही, और घी से अभिषेक किया जाता है। इसके साथ ही बेलपत्र, धतूरा, और भांग अर्पित किए जाते हैं, जो भगवान शिव को प्रिय हैं।
- मंत्र जाप और पूजा: "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव की पूजा की जाती है।
- रात्रि जागरण: रात्रि के चार प्रहरों में विशेष पूजा और भजन-कीर्तन आयोजित किए जाते हैं, जिससे भक्तगण पूरी रात जागकर भगवान शिव की आराधना करते हैं।
यह है पूजा का शुभ मुहूर्त
बता दें कि महाशिवरात्रि के दिन रात में चार प्रहरों में पूजा करने से भक्तों की मनवांछित इच्छाएं पूरी होती है। आपको इन चारों प्रहरों के पूजा मुहूर्त के बारे में विस्तार से बताते हैं।
- पहला प्रहर शाम 6:19 बजे से रात 9:26 बजे तक रहेगा
- दूसरा प्रहर रात 9:26 बजे से आधी रात 12:34 बजे तक रहेगा
- वहीं, तीसरा प्रहर आधी रात के 12:34 बजे से आधी रात 3:41 बजे तक रहेगा
- पांचवा प्रहर आधी रात 3:41 बजे से सुबह 6:48 बजे तक रहेगा।
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क्या है पूजा की विधि
- स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े धारण करें।
- संकल्प: महादेव की पूजा और व्रत का संकल्प लें।
मंदिर को ऐसे करें तैयार
- शिवलिंग स्थापना: घर के पूजा मंदिर पर शिवलिंग को स्थापित करें। आप मिट्टी का भी शिवलिंग बना सकते हैं।
- साफ-सफाई: पूजा मंदिर की अच्छे से सफाई कर लें और एक दिया जला लें।
महादेव का करें अभिषेक
- पंचामृत से करें अभिषेक: शिवलिंग को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएं।
- गंगाजल से कराएं स्नान: पंचामृत के बाद गंगाजल या शुद्ध जल से शिवलिंग को स्नान कराएं।
श्रृंगार और अर्पण
- बेलपत्र अर्पण: शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाएं
- फूल और धतूरा: सुगंधित फूल, धतूरा और भांग अर्पित करें।
- चंदन और अक्षत: चंदन का लेप लगाएं और अक्षत (चावल) चढ़ाएं।
- धूप और दीप जलाएं: धूपबत्ती और दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें।
- इन चीजों का लगाएं भोग: फल, मिठाई और सात्विक भोजन भगवान को भोग में लगाएं।
मंत्र जाप: "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
अगले दिन पारण: अगले दिन प्रातःकाल स्नान के बाद ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण करें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।